Home ताजा खबरवांद्रे परिघा खाड़ी का होगा कायाकल्प, 450 झोपड़ियों का पुनर्वास कर बनेगा व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स

वांद्रे परिघा खाड़ी का होगा कायाकल्प, 450 झोपड़ियों का पुनर्वास कर बनेगा व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स

by trilokvivechana
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म्हाडा ने 28 हजार वर्गमीटर जमीन के विकास के लिए जारी की निविदा, 392 करोड़ रुपये राजस्व की उम्मीद

मुंबई। वांद्रे पश्चिम के परिघा खाड़ी क्षेत्र में स्थित म्हाडा की जमीन का जल्द ही कायाकल्प होने जा रहा है। रेलवे पटरियों के पास लंबे समय से झोपड़ियों से घिरे इस इलाके को अब एक आधुनिक व्यावसायिक परिसर के रूप में विकसित किया जाएगा। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) के मुंबई मंडल ने इस परियोजना के लिए शुक्रवार को निविदा जारी कर दी है।

करीब 28 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैली इस जमीन पर फिलहाल बड़ी संख्या में झोपड़ियां बनी हुई हैं। अनुमान के अनुसार यहां लगभग 450 झोपड़ियां मौजूद हैं, जिन्हें अतिक्रमण माना जाता है। प्रस्तावित योजना के तहत इन सभी झोपड़ियों के निवासियों का पुनर्वास किया जाएगा। इसके बाद उसी भूमि पर आधुनिक व्यावसायिक इमारतों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से म्हाडा के मुंबई मंडल को कम से कम 392 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है।

यह भूखंड वांद्रे रेलवे स्टेशन के पश्चिमी हिस्से में रेलवे पटरियों से लेकर एस. वी. रोड तक फैला हुआ है। यह जमीन मूल रूप से व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित है, लेकिन कई वर्षों तक इस पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण यहां धीरे-धीरे झोपड़ियां बनती चली गईं। इससे इलाके का स्वरूप अव्यवस्थित और बेतरतीब हो गया था। अब म्हाडा ने इस भूमि के व्यवस्थित विकास का फैसला लिया है।

म्हाडा के अधिकारियों के अनुसार परिघा खाड़ी क्षेत्र के भूखंड क्रमांक 7 और 8 को इस परियोजना के तहत विकसित किया जाएगा। निविदा प्रक्रिया के माध्यम से जिस डेवलपर या ठेकेदार का चयन किया जाएगा, उसे झोपड़ीवासियों के पुनर्वास के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि झोपड़ियों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास उसी परिसर में या आसपास किया जाएगा, ताकि उन्हें विस्थापन की समस्या का सामना न करना पड़े।

निविदा की शर्तों के मुताबिक 28 हजार वर्गमीटर के इस भूखंड को व्यावसायिक विकास के लिए 30-30 वर्ष की अवधि के लिए लीज पर दिया जाएगा। चूंकि यह जमीन व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित है, इसलिए डेवलपर को यहां केवल व्यावसायिक परिसर ही विकसित करना होगा। इसमें ऊंची इमारतें, कार्यालय परिसर और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं विकसित किए जाने की संभावना है।

म्हाडा ने इस परियोजना के लिए न्यूनतम बोली दर भी निर्धारित कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से मुंबई मंडल को कम से कम 392 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही इस इलाके के विकास से वांद्रे पश्चिम के शहरी स्वरूप में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

म्हाडा का लक्ष्य है कि निविदा प्रक्रिया को जल्द पूरा कर परियोजना को अंतिम रूप दिया जाए और उसके बाद झोपड़ियों के पुनर्वास तथा व्यावसायिक परिसर के निर्माण का कार्य शुरू किया जाए। इस परियोजना से न केवल इलाके का स्वरूप बदलेगा, बल्कि मुंबई मंडल को आर्थिक रूप से भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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