
पटना। बिहार के गया जिले के टिकारी प्रखंड स्थित केसपा गांव में प्राचीन मां तारा देवी मंदिर को लेकर एक बार फिर जनभावनाएं मुखर हो उठी हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि मां तारा देवी महोत्सव का आयोजन पूर्व की तरह वसंतीय नवरात्र के अवसर पर ही किया जाए। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने बिहार के मुख्यमंत्री, पर्यटन विभाग के सचिव तथा गया के जिला पदाधिकारी को आवेदन भेजकर स्थानीय लोगों की भावनाओं से अवगत कराया है।
हिमांशु शेखर ने अपने आवेदन में कहा है कि केसपा गांव स्थित मां तारा देवी मंदिर पूरे क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से वसंतीय नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। इसी धार्मिक आस्था और परंपरा को देखते हुए पिछले वर्ष बिहार सरकार ने वसंतीय नवरात्र के अवसर पर मां तारा देवी महोत्सव की शुरुआत की थी। इस आयोजन से न केवल धार्मिक माहौल को बल मिला, बल्कि क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई पहचान मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि इस महोत्सव के आयोजन से केसपा गांव और आसपास के इलाकों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला था। दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचकर मां तारा देवी के दर्शन करते हैं। इससे स्थानीय लोगों को भी आर्थिक और सामाजिक रूप से लाभ मिलता है। यही कारण है कि इस वर्ष भी लोग वसंतीय नवरात्र के अवसर पर ही इस महोत्सव के आयोजन की उम्मीद कर रहे थे।
हालांकि, हाल ही में यह जानकारी सामने आई है कि पर्यटन विभाग ने पूर्व विधायक डॉ. अनिल कुमार के अनुरोध पर इस महोत्सव को शारदीय नवरात्र के दौरान आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में असंतोष का माहौल है। उनका कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की परंपरा और जनभावनाओं के अनुरूप नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि वसंतीय नवरात्र के समय मंदिर के आसपास की कृषि भूमि खाली रहती है, क्योंकि उस दौरान खेतों में फसल नहीं होती। ऐसे में महोत्सव के आयोजन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालना आसान रहता है। इसके विपरीत, शारदीय नवरात्र के समय खेतों में फसल लगी रहती है, जिससे आयोजन के लिए पर्याप्त जगह मिलना मुश्किल हो सकता है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि वसंतीय नवरात्र के दौरान महोत्सव का आयोजन धार्मिक दृष्टि से भी अधिक उपयुक्त माना जाता है। इसलिए सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मां तारा देवी महोत्सव को पूर्व की परंपरा के अनुसार वसंतीय नवरात्र के अवसर पर ही आयोजित कराया जाए, ताकि क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखा जा सके। उनका कहना है कि यदि सरकार इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे न केवल स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।