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ठाणे में ड्रेनेज निर्माण पर विवाद, शिवलिंग जैसे आकार को लेकर नाराजगी

by trilokvivechana
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ठाणे : मिरा-भाईंदर में मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा बनाए गए फ्लाईओवर की डिजाइन को लेकर पहले ही विवाद खड़ा हो चुका है। अब ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र में एक ड्रेनेज निर्माण कार्य को लेकर नया विवाद सामने आया है। ड्रेनेज के पानी की निकासी के लिए किए गए कार्य का स्वरूप शिवलिंग जैसा दिखाई देने पर सामाजिक कार्यकर्ता ने आपत्ति जताते हुए तीखी नाराजगी व्यक्त की है।

मामला ठाणे के तीन पेट्रोल पंप क्षेत्र का है, जहां सड़क के नीचे ड्रेनेज लाइन बिछाई गई है और उसके ढक्कन सड़क पर मौजूद हैं। यह ड्रेनेज लाइन अक्सर जाम हो जाती है, जिससे पानी ढक्कन के माध्यम से सड़क पर बहने लगता है। लगातार बहते पानी और उससे फैलने वाली दुर्गंध के कारण स्थानीय नागरिकों को काफी असुविधा हो रही थी।

समस्या के समाधान के लिए एक ठेकेदार ने ड्रेनेज ढक्कन के चारों ओर दीवारनुमा संरचना तैयार की और उसे पास के नाले के मुहाने तक जोड़ दिया। हालांकि, इस निर्माण के बाद इसका स्वरूप विवाद का कारण बन गया। ढक्कन के चारों ओर बनाई गई संरचना और उस पर रखे गए पत्थरों के कारण यह आकृति शिवलिंग जैसी प्रतीत हो रही है। इसी आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता संगम डोंगरे ने कड़ी आपत्ति जताई है।

डोंगरे का कहना है कि उन्होंने पिछले कई दिनों से इस समस्या को लेकर संबंधित विभागों को शिकायतें दीं, आंदोलन किया और पत्राचार भी किया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि नौपाड़ा क्षेत्र के नागरिक नियमित रूप से कर का भुगतान करते हैं, फिर भी उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बहते गटर के पास एक विद्यालय स्थित है, जहां से गुजरने वाले छात्रों और स्थानीय निवासियों को दुर्गंध के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए थी, ताकि किसी प्रकार की धार्मिक भावना आहत न हो।

संगम डोंगरे ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की संरचना से हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने संबंधित कंत्राटदार के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है और इस संबंध में पुलिस को सूचित करने की बात कही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों के कर के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए, क्योंकि जनता के धन का उचित उपयोग सुनिश्चित होना आवश्यक है।

फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन से स्पष्टता तथा समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।

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