Home ताजा खबरम्हाडा आवास योजनाओं में ओबीसी के लिए अलग श्रेणी की मांग तेज, उपमुख्यमंत्री को भेजा विस्तृत पत्र

म्हाडा आवास योजनाओं में ओबीसी के लिए अलग श्रेणी की मांग तेज, उपमुख्यमंत्री को भेजा विस्तृत पत्र

by trilokvivechana
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मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार गुट के प्रदेश प्रवक्ता और युवक मुंबई अध्यक्ष एडवोकेट अमोल मातेले ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री तथा नगर विकास व आवास मंत्री एकनाथ शिंदे को ई मेल के माध्यम से एक विस्तृत पत्र भेजकर म्हाडा (महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) की आवास योजनाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग श्रेणी और विशेष सुविधाएं लागू करने की मांग उठाई है।

अपने पत्र में मातेले ने उल्लेख किया है कि वर्तमान में म्हाडा द्वारा संचालित विभिन्न आवास योजनाओं में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्गों के लिए आरक्षण और विशेष प्रावधान उपलब्ध हैं। हालांकि, ओबीसी वर्ग के लिए कोई पृथक श्रेणी निर्धारित नहीं है, जिसके कारण इस वर्ग के आवेदकों को सामान्य श्रेणी के तहत आवेदन करना पड़ता है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को प्रतिस्पर्धा में असमान स्थिति का सामना करना पड़ता है, जो समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत है।

मातेले ने कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का हवाला देते हुए कहा कि म्हाडा अधिनियम 1976 में आवास वितरण के दौरान सामाजिक न्याय, समावेशिता और कमजोर वर्गों के संरक्षण का स्पष्ट प्रावधान है। इसके बावजूद ओबीसी वर्ग को अलग श्रेणी में शामिल न किया जाना नीतिगत कमी को दर्शाता है।

उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4) और 16(4) का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और बॉम्बे हाई कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि समाज के पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना न्यायपूर्ण व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा है। ओबीसी वर्ग के लिए अलग अवसरों का अभाव अप्रत्यक्ष असमानता को जन्म देता है।

पत्र में मातेले ने मांग की है कि म्हाडा की सभी आवास योजनाओं में ओबीसी वर्ग के लिए पृथक श्रेणी बनाई जाए। इसके अलावा, ओबीसी आवेदकों के लिए आरक्षण या कोटा तय किया जाए और उन्हें आवश्यक रियायतें प्रदान की जाएं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर म्हाडा अधिनियम 1976 में संशोधन कर ओबीसी वर्ग का स्पष्ट समावेश सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राज्य सरकार से इस विषय पर शीघ्र नीतिगत निर्णय लेकर इसे लागू करने की मांग की गई है।

एडवोकेट अमोल मातेले ने कहा, “आवास प्रत्येक नागरिक का मूलभूत अधिकार है। सामाजिक न्याय के दायरे में सभी वर्गों को समान और न्यायसंगत अवसर मिलना आवश्यक है। यदि ओबीसी वर्ग को अलग स्थान नहीं दिया गया, तो यह वर्ग योजनाओं से वंचित रह सकता है।”

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए म्हाडा योजनाओं में ओबीसी वर्ग का समावेश अत्यंत आवश्यक है। मातेले ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेकर आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

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