Home ताजा खबर829 स्कूलों पर संकट, 794 कक्षाएं भी दायरे में; सरकार का सख्त फैसला, शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

829 स्कूलों पर संकट, 794 कक्षाएं भी दायरे में; सरकार का सख्त फैसला, शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

by trilokvivechana
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मुंबई: राज्य की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। लंबे समय से बिना अनुदान के आधार पर संचालित और बार-बार मूल्यांकन में असफल साबित हुई 829 स्कूलों तथा 794 कक्षाओं को वेतन अनुदान के लिए स्थायी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इस निर्णय से शिक्षा क्षेत्र में हलचल मच गई है।

प्रभावित संस्थाओं में 324 माध्यमिक स्कूल और 505 उच्च माध्यमिक व जूनियर कॉलेज शामिल हैं। सरकार ने पहले कई चरणों में इन स्कूलों को सुधार का अवसर दिया था और संशोधित मानदंडों के आधार पर पात्र संस्थाओं को अनुदान भी प्रदान किया गया। बावजूद इसके, अनेक स्कूल लगातार निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर सके, जिसके बाद यह कठोर निर्णय लिया गया।

नियमों के मुताबिक, यदि कोई स्कूल लगातार तीन वर्षों तक मूल्यांकन में असफल रहता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। इसी संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के 9 दिसंबर 2016 के फैसले ने भी सरकार के मानदंडों को वैधता प्रदान की थी। उसी आधार पर अब यह कार्रवाई अमल में लाई गई है।

इस फैसले का सबसे अधिक असर मुंबई महानगर क्षेत्र पर पड़ा है। ठाणे जिले में 68 संस्थाएं, मुंबई में 54 और पालघर में 46 संस्थाएं इस सूची में शामिल हैं। यानी इन तीन जिलों में ही 168 संस्थाओं का सरकारी अनुदान बंद होने जा रहा है। इसके अलावा पुणे, रायगढ़ और नाशिक सहित कई अन्य जिलों में भी स्कूल इस कार्रवाई की जद में आए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

स्कूलों को अंतिम अवसर
सरकार ने प्रभावित स्कूलों को एक आखिरी मौका देते हुए 30 अप्रैल 2026 तक स्वयं वित्तपोषित (सेल्फ-फाइनेंस) आधार पर मान्यता लेने का विकल्प दिया है। इसके लिए स्कूलों को माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा निदेशक, पुणे के समक्ष आवेदन करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ मान्यता आदेश, अद्यतन आधार रिपोर्ट और आरटीई मान्यता जैसे जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।

समयसीमा चूकी तो मान्यता खत्म
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में आवेदन न करने वाले स्कूलों की मान्यता स्वतः रद्द कर दी जाएगी। ऐसे में वहां पढ़ने वाले छात्रों को नजदीकी अनुदानित या स्थानीय निकाय के स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। यह प्रक्रिया 1 मई से 31 मई 2026 के बीच पूरी की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।

डिजिटल रिकॉर्ड से भी हटेंगी संस्थाएं
मान्यता रद्द होने के बाद इन स्कूलों को यू-डायस और ‘सरल’ पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। शिक्षा अधिकारियों को 31 मई तक प्रस्ताव भेजने होंगे, जिसके बाद 10 दिनों के भीतर अंतिम कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का कहना है कि यह फैसला छात्रों के हित को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है। बार-बार अवसर देने के बावजूद जब सुधार नहीं हुआ, तब शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम जरूरी हो गया। अब यह देखना अहम होगा कि प्रभावित संस्थाएं इस अंतिम अवसर का लाभ उठाती हैं या नहीं।

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