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टोरंटो अंतरराष्ट्रीय चलचित्र महोत्सव: स्वर्ण जयंती संस्करण में भारतीय सिनेमा की दमदार उपस्थिति

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टोरंटो। विश्व सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक टोरंटो अंतरराष्ट्रीय चलचित्र महोत्सव (TIFF) इस वर्ष अपने स्वर्ण जयंती संस्करण का आगाज करने जा रहा है। 4 से 14 सितंबर 2025 तक चलने वाले इस महोत्सव की शुरुआती सूची में 117 फ़िल्मों की घोषणा की गई है, जिनमें भारत से भी चार चर्चित फ़िल्में शामिल हैं। इन फ़िल्मों में नीरज घेवन की होमबाउंड, अनुराग कश्यप की बंदर, विकास मिश्रा की बयान और रमेश सिप्पी की कालजयी कृति शोले का नवीन डिजिटल संस्करण शामिल हैं।

भारतीय दर्शकों के लिए इस बार का महोत्सव बेहद खास माना जा रहा है। होमबाउंड, जिसे पहले ही कान महोत्सव में सराहना मिल चुकी है, इसमें ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिकाएँ हैं। यह कहानी दो मित्रों के बीच बदलते समय और परिस्थितियों से उपजे तनाव को बयां करती है। मसान (2015) से अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके नीरज घेवन की यह पहली फ़िल्म होगी जो टोरंटो महोत्सव में प्रदर्शित होगी। इसकी विशेषता यह भी है कि विश्वविख्यात फिल्मकार मार्टिन स्कॉर्सेसी इसके कार्यकारी निर्माता के रूप में जुड़े हुए हैं।

अनुराग कश्यप की बंदर का यहाँ उत्तरी अमरीकी प्रथम प्रदर्शन होगा। वहीं, विकास मिश्रा की बयान, जिसमें हुमा कुरैशी, चंद्रचूड़ सिंह और सचिन खेड़ेकर ने अभिनय किया है, रॉटरडैम महोत्सव के ह्यूबर्ट बाल्स कोष से सहयोग प्राप्त करने वाली फ़िल्मों में से है। सबसे भावनात्मक क्षण निस्संदेह वह होगा जब महोत्सव में शोले का नया डिजिटल संस्करण प्रदर्शित होगा। अपनी पचासवीं वर्षगांठ मना रही यह फ़िल्म भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर मानी जाती है और दर्शकों के लिए गर्व का विषय है।

हालाँकि, चर्चा इस बात को लेकर भी है कि आने वाली सूचियों में और कितनी भारतीय भाषाओं की फ़िल्में जगह बनाएंगी। पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण भारतीय सिनेमा की उपस्थिति यहाँ नगण्य रही है, जिससे फिल्म प्रेमियों में निराशा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बार महोत्सव बेहद खास है। एलेक्स विंटर की एडल्टहुड, स्कारलेट जोहानसन की एलेनोर द ग्रेट, अज़ीज़ अंसारी की गुड फॉर्च्यून, गिलर्मो डेल टोरो की फ्रैंकनस्टाइन, जाफ़र पनाही की इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट और स्टीवन सोडरबर्ग की द क्रिस्टोफर्स जैसी बहुचर्चित फ़िल्में दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेंगी।

कनाडा में इस महोत्सव को लंबे समय से “उत्सवों का उत्सव” कहा जाता है। आँकड़ों के अनुसार हर साल लगभग पाँच लाख दर्शक इसमें शामिल होते हैं, जिनमें दो हज़ार से अधिक पत्रकार और ढाई हज़ार से ज्यादा स्वयंसेवक मौजूद रहते हैं। साथ ही, यहाँ प्रदर्शित होने वाली बड़ी संख्या में फ़िल्में आगे चलकर ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही हैं।

इस बार का स्वर्ण जयंती संस्करण न केवल भारतीय सिनेमा बल्कि विश्वभर के फिल्मप्रेमियों के लिए ऐतिहासिक और यादगार साबित होने की उम्मीद है।

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