लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। बाराबंकी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि योगी सरकार के सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। संगठन ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा माफिया पर कार्रवाई नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
दरअसल, बीते दिनों बाराबंकी की रामस्वरूप यूनिवर्सिटी में एबीवीपी से जुड़े छात्र अवैध रूप से संचालित हो रहे पाठ्यक्रमों का विरोध कर रहे थे। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षा माफिया के दबाव में छात्रों से मनमानी फीस वसूल रहा है और गैरकानूनी तरीके से पाठ्यक्रम चला रहा है। इसी दौरान आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में 20 से अधिक छात्र घायल हो गए। घायलों में कई को गंभीर चोटें भी आईं। घटना के बाद से न केवल बाराबंकी बल्कि लखनऊ और अन्य जिलों में भी छात्र संगठन के कार्यकर्ता सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
फोटो-सोशल मीडिया
लाठीचार्ज और उसके बाद मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बयान से नाराज एबीवीपी ने गुरुवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। संगठन के राष्ट्रीय मंत्री अंकित शुक्ला ने कहा कि सरकार को अगले 48 घंटे के भीतर तीन मांगें पूरी करनी होंगी—
- -बाराबंकी लाठीचार्ज मामले में दोषी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई।
- -रामस्वरूप यूनिवर्सिटी सहित प्रदेश में चल रहे अवैध पाठ्यक्रमों को बंद करना।
- -छात्रों से मनमाने तरीके से वसूली जा रही फीस पर रोक लगाना।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो विद्यार्थी परिषद प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी।
लाठीचार्ज विवाद के बीच योगी सरकार के मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बयान ने संगठन को और भड़का दिया। राजभर ने हाल ही में दिए एक बयान में इस मुद्दे को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसे एबीवीपी ने अपमानजनक बताया है।
संगठन ने राजभर से सार्वजनिक माफी की मांग की है। एबीवीपी नेताओं का कहना है कि मंत्री का बयान छात्रों के संघर्ष को कमजोर करने वाला है और इससे आंदोलनकारियों का मनोबल गिराने की कोशिश की गई है।
उत्तर प्रदेश में शिक्षा माफिया का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है। निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अवैध पाठ्यक्रम चलाने, फीस वसूली और छात्रों को गुमराह करने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। एबीवीपी का आरोप है कि प्रशासन और सरकार के कुछ हिस्सों की मिलीभगत से यह खेल लगातार जारी है। बाराबंकी की घटना के बाद यह मुद्दा और अधिक गरम हो गया है। संगठन का कहना है कि छात्रों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।
घटना और राजभर के बयान के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि फिलहाल एबीवीपी सीधे तौर पर सरकार को चेतावनी दे रही है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को सियासी हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकता है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक यह मामला चर्चा का विषय बन गया है, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद सियासी गर्मी को और बढ़ा सकता है।
लाठीचार्ज की घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग उचित नहीं था। वहीं पुलिस का कहना है कि छात्रों के प्रदर्शन ने कानून व्यवस्था बिगाड़ने की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसके चलते बल प्रयोग करना पड़ा। सरकार ने अभी तक इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। एबीवीपी के अल्टीमेटम के बाद अब सबकी निगाहें सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हैं। यदि 48 घंटे के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो संगठन द्वारा प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा निश्चित रूप से सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
