प्रतिनिधि -गडचिरौली
विदर्भ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध रूप से शराब की बिक्री लगातार जारी है। इससे क्षुब्ध मन्नेराजाराम ग्रामपंचायत (जिला: गडचिरौली) ने एक साहसिक और सामाजिक रूप से कठोर कदम उठाते हुए ग्रामसभा में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। अब गांव में किसी भी अवैध शराब विक्रेता की मृत्यु होने पर उनके अंतिम संस्कार में गांववासी भाग नहीं लेंगे।
सामूहिक निर्णय, सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी
ग्राम पंचायत, पेसा ग्रामसभा, गोटूल समिति, मुक्तिपथ व शक्तिपथ महिला संगठन, युवा संगठन तथा पड़ोसी गांवों — यचली और बामनपल्ली — के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। साथ ही, शराब बेचने वालों पर ₹20,000 का जुर्माना लगाने का भी निर्णय लिया गया है। ग्रामसभा के इस निर्णय से अवैध शराब विक्रेताओं में खलबली मच गई है। यह निर्णय सामाजिक स्तर पर शराब विक्रेताओं को हतोत्साहित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।
गांधीवादी पद्धति से विरोध: फूल देकर चेतावनी
इस निर्णय के तहत गांव में एक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में शराब विक्रेताओं को दंडित करने के बजाय उन्हें गुलदस्ते भेंट कर गांधीवादी तरीके से यह संदेश दिया गया कि यदि भविष्य में शराब बेचना जारी रखा गया, तो उन्हें सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ेगा। महिलाओं और युवाओं की इस रैली में उल्लेखनीय भागीदारी रही। महिला संगठनों ने शराब से हो रहे घरेलू संकटों पर प्रकाश डाला, वहीं युवाओं ने अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए नशामुक्त वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रशासन का भी समर्थन
ग्रामसभा के निर्णय की सराहना करते हुए स्थानीय प्रशासन ने शराबबंदी अभियान को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया है। पुलिस विभाग ने भी अवैध शराब विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही है।
मुख्य बातें संक्षेप में
-अवैध शराब विक्रेताओं के अंतिम संस्कार में न शामिल होने का प्रस्ताव पारित
-₹20,000 का आर्थिक दंड तय
-गांधीवादी रैली में फूलों से विरोध
-महिला और युवा संगठनों की प्रभावी भागीदारी
-प्रशासन की ओर से कार्रवाई और सहयोग का आश्वासन
