मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी और बैंकर-सोशल एक्टिविस्ट अमृता फडणवीस इन दिनों अपने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पहने गए परिधान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में अमृता फडणवीस ने मुंबई के जुहू बीच पर आयोजित सफाई अभियान में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने स्किन-कलर का स्किन-टाइट जिम ट्रैक सूट पहना था। इस मौके पर बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार भी मौजूद थे। सफाई अभियान से ज्यादा चर्चा सोशल मीडिया पर उनकी ड्रेस को लेकर हुई।
ट्रोलर्स के निशाने पर आईं
कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने अमृता फडणवीस के पहनावे को लेकर आपत्ति जताई। लोगों का कहना था कि समुद्र तट सफाई जैसे गंभीर और सार्वजनिक अभियान के लिए उनका पहनावा अनुपयुक्त था। कुछ लोगों ने यह तक लिखा कि यह योग दिवस जैसा कोई फिटनेस इवेंट नहीं था, जहां इस तरह के परिधान स्वीकार्य हों।
कई यूजर्स ने उनसे भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुरूप सार्वजनिक समारोहों में अधिक शालीन और उपयुक्त परिधान पहनने की अपील की। वहीं कुछ लोगों ने व्यंग्य करते हुए उनके ड्रेस डिजाइनर का नाम पूछ लिया तो कुछ ने उनकी तुलना केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से कर डाली।
अमृता फडणवीस का जवाब
ट्रोलर्स की आलोचना के बाद अमृता फडणवीस ने दो दिन बाद इशारों-इशारों में जवाब दिया। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस अभियान का वीडियो पोस्ट किया और उसमें अपने भाषण का हिस्सा भी साझा किया। वीडियो में अमृता कहती नजर आईं—“आप इस भारत और दुनिया का भविष्य हैं। जितनी स्वच्छ हमारी बीच रहेगी, उतना ही उज्ज्वल आपका भविष्य होगा।” अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि, “अपने राष्ट्र की सुंदरता को संरक्षित करने के लिए समर्पित राजदूतों के रूप में, हमारा मानना है कि स्वच्छता और स्थिरता की संस्कृति को बढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है।”
इस पोस्ट में उन्होंने अक्षय कुमार और इस अभियान में शामिल सभी लोगों को टैग भी किया।
विवाद थमने के बजाय बढ़ा
हालांकि उनका यह पोस्ट विवाद थामने के बजाय और बढ़ा गया। कई यूजर्स ने दोबारा उनके पहनावे पर टिप्पणी की और लिखा कि वह मुख्यमंत्री की पत्नी हैं, इसलिए उन्हें सार्वजनिक मंच पर अधिक सावधानी और भारतीय संस्कृति का सम्मान करते हुए प्रस्तुत होना चाहिए।
मुद्दा क्या है?
अमृता फडणवीस का यह विवाद दिखाता है कि आज भी सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हस्तियों के लिए पहनावे का चुनाव एक संवेदनशील विषय है। जहां कुछ लोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता के आधार पर इसे उनका निजी अधिकार मानते हैं, वहीं कई लोगों का मानना है कि ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
