उत्तर प्रदेश में ‘आई लव मोहम्मद’ के बैनर को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच लखनऊ में एक नया मोड़ सामने आया है। बुधवार को लखनऊ में भाजपा युवा मोर्चा के नेता अमित त्रिपाठी द्वारा एक पोस्टर लगाया गया, जिस पर लिखा था ‘आई लव बुलडोजर’ और साथ ही ‘आई लव योगी आदित्यनाथ जी’ का संदेश भी दिया गया। यह पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। अमित त्रिपाठी, जो भाजपा युवा मोर्चा लखनऊ में महामंत्री हैं, का यह कदम ‘आई लव मोहम्मद’ बैनर विवाद के संदर्भ में किया गया माना जा रहा है।
इस विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को कानपुर के रावतपुर इलाके में बारावफात (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) के जुलूस के दौरान हुई। उस समय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक बैनर लगाया था, जिस पर लिखा था ‘आई लव मोहम्मद’। इस पर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई और कहा कि बारावफात के जुलूस में यह नई परंपरा शुरू की जा रही है। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया और पोस्टर फाड़ने और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
कानपुर के इस विवाद के बाद मामला बरेली तक पहुंचा। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बरेली में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई और लाठीचार्ज किया। इस दौरान इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर और कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना पर सख्त प्रतिक्रिया दी और कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा, “आपने देखा होगा कल बरेली के अंदर… वह मौलाना भूल गया कि शासन किसका है। उसने धमकी देने की कोशिश की, लेकिन हमने स्पष्ट कर दिया कि जबरदस्ती नहीं चलेगी। कर्फ्यू का सबक मिलेगा और आने वाली पीढ़ी दंगा करना भूल जाएगी।”
मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के साथ ही इस विवाद का असर अन्य राज्यों तक भी फैला। उत्तराखंड, तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर लेकर प्रदर्शन किए। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर तनाव की स्थिति बनी और पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए कदम उठाए।
लखनऊ में वायरल हुए ‘आई लव बुलडोजर’ पोस्टर ने इस विवाद को और राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान में ला दिया। भाजपा युवा मोर्चा के नेता अमित त्रिपाठी का यह कदम राजनीतिक और सांस्कृतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे समाज में वर्तमान विवाद और उसके प्रभाव को दर्शाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पोस्टर को हटाने और इलाके में शांति बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती है और प्रशासन को स्थिति को संतुलित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्टर ने जनता के बीच प्रतिक्रियाओं को विभाजित कर दिया है, कुछ लोग इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं तो कुछ लोग इसे सामाजिक संवेदनाओं को भड़काने वाला मान रहे हैं।
इस पूरी घटना में प्रशासन, पुलिस और राजनीतिक दलों की भूमिका महत्वपूर्ण बन गई है। कानपुर से शुरू होकर बरेली और लखनऊ तक फैलते विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर संवेदनशीलता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पोस्टर और प्रदर्शन के माध्यम से जनता की प्रतिक्रिया ने यह भी दिखाया कि डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में छोटे घटनाक्रम बड़े सामाजिक बहस का रूप ले सकते हैं।
