दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग को खारिज करते हुए इसकी रिलीज का रास्ता साफ कर दिया है। यह जनहित याचिका अधिवक्ता शकील अब्बास और भाजपा नेता रजनीश सिंह की ओर से दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फिल्म ताजमहल से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है और इससे साम्प्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया और कहा कि मामला नियमानुसार निर्धारित समय पर ही सुना जाएगा। इस फैसले के साथ ही फिल्म की रिलीज को लेकर सभी अटकलें समाप्त हो गईं।
फिल्म के निर्देशक तुषार अमरीश गोयल ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि ‘द ताज स्टोरी’ किसी अफवाह या कल्पना पर नहीं, बल्कि छह महीने के गहन शोध और प्रमाणित ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म की सभी सामग्री की गहराई से जांच करने के बाद इसे हरी झंडी दी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि फिल्म में किसी भी तरह की भ्रामक या विवादास्पद सामग्री नहीं है।
निर्माता सीए सुरेश झा ने इस निर्णय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनात्मकता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि इतिहास पर खुली चर्चा और संवाद की भावना को प्रोत्साहित करना है। झा के अनुसार, फिल्म का मकसद दर्शकों को सोचने पर मजबूर करना है कि क्या भारत आजादी के 79 साल बाद भी बौद्धिक रूप से वास्तव में स्वतंत्र हुआ है।
फिल्म में परेश रावल, जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ और नमित दास जैसे अनुभवी कलाकार नजर आएंगे। स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज के बैनर तले निर्मित इस फिल्म में संगीतकार रोहित शर्मा और राहुल देव नाथ ने संगीत दिया है।
फिल्म को एक सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से साहसी प्रयोग माना जा रहा है, जो ताजमहल की कथा के माध्यम से सत्ता, इतिहास और विचार की सीमाओं पर प्रश्न उठाती है। निर्देशक गोयल ने कहा कि फिल्म किसी भी प्रकार के विवाद से अधिक संवाद की भावना को बढ़ावा देती है। ‘द ताज स्टोरी’ देशभर के सिनेमाघरों में 31 अक्टूबर 2025 को रिलीज होगी।
