मीरा-भायंदर। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र में मीरा-भायंदर मनपा की परिवहन सेवा बुरी तरह चरमरा गई है। कुल 131 बसों में से आधी से ज्यादा बसें खराब हालत में डिपो में खड़ी हैं। वजह है कॉन्ट्रैक्टर की घोर लापरवाही। मरम्मत न होने से यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मंत्री अपने क्षेत्र की ट्रांसपोर्ट सेवा नहीं सुधार पा रहे तो प्रदेश की दूसरी सेवाओं की क्या गारंटी?
मीरा-भायंदर मनपा की परिवहन सेवा 2005 में शुरू हुई थी। उस समय इसे शहर की बढ़ती आबादी के लिए वरदान माना गया था। लेकिन पिछले 18 सालों में यह सेवा हमेशा विवादों में रही। वर्तमान में मनपा के बेड़े में 74 डीजल बसें और 57 इलेक्ट्रिक बसें हैं। ये बसें मीरा-भायंदर के अंदरूनी इलाकों के साथ-साथ मुंबई और ठाणे के रूटों पर चलती हैं। शहर की आबादी तेजी से बढ़कर करीब 12 लाख हो चुकी है, लेकिन बसों की संख्या नाकाफी है। इसके बावजूद जो बसें हैं, उनकी हालत ऐसी है कि आधी से ज्यादा सड़क पर नहीं उतर पा रही हैं।
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, 74 डीजल बसों में से 34 बसें लंबे समय से रिपेयर के इंतजार में डिपो में खड़ी हैं। यानी करीब 46 फीसदी डीजल बसें बेकार पड़ी हैं। इलेक्ट्रिक बसें तो चल रही हैं, लेकिन उनकी संख्या भी जरूरत के मुकाबले कम है। नतीजतन, सुबह-शाम पीक ऑवर्स में बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो रही है। कई लोग घंटों इंतजार करने के बाद ऑटो या प्राइवेट वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
यात्रियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। मीरा रोड निवासी रमेश शर्मा ने कहा, “पहले तो बसें कम हैं, ऊपर से जो हैं वो भी खराब। सुबह ऑफिस जाने में दो-दो घंटे लग जाते हैं। मंत्री जी अपने क्षेत्र में ही सेवा नहीं सुधार पा रहे, फिर प्रदेश की बात क्या करें?” भायंदर की गृहिणी प्रीति पवार ने बताया, “स्कूल बसें भी कम चल रही हैं। बच्चों को समय पर स्कूल छोड़ना मुश्किल हो गया है।”
मनपा प्रशासन भी कॉन्ट्रैक्टर की लापरवाही से परेशान है। डिप्टी कमिश्नर (ट्रांसपोर्ट) सचिन बांगर ने बताया, “कॉन्ट्रैक्टर को बार-बार चेतावनी दी गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनका कॉन्ट्रैक्ट क्यों न रद्द कर दिया जाए। उन्हें 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है कि सभी खराब बसों की मरम्मत कर सेवा बहाल करें, वरना कानूनी कार्रवाई होगी।”
बांगर ने आगे कहा, “हम यात्रियों को अच्छी सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कॉन्ट्रैक्टर की लापरवाही के कारण मनपा को रोजाना लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। डीजल बसें खड़ी रहने से टिकट राजस्व घट गया है। हम जल्द ही नया टेंडर प्रोसेस शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।”
स्थानीय पार्षदों ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। भाजपा पार्षद संजय पाटिल ने कहा, “यह शर्मनाक है कि परिवहन मंत्री का अपना क्षेत्र ही ट्रांसपोर्ट सुविधा से वंचित है। मनपा आयुक्त को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।” विपक्षी पार्षद रवि व्यास ने आरोप लगाया, “कॉन्ट्रैक्टर और अधिकारियों की मिलीभगत से बसें जानबूझकर खराब रखी जा रही हैं ताकि प्राइवेट ऑपरेटरों को फायदा हो।”
ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञों का कहना है कि मीरा-भायंदर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में कम से कम 250 बसों की जरूरत है। लेकिन मौजूदा हालात में तो मौजूद बसें भी ठीक नहीं चल पा रही हैं। मनपा अब इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है, लेकिन उसमें भी समय लगेगा।
फिलहाल यात्रियों की एक ही मांग है – बसें जल्द से जल्द सड़क पर लौटें। 15 दिन की डेडलाइन खत्म होने के बाद मनपा क्या कदम उठाती है, यह देखने वाली बात होगी। नहीं तो परिवहन मंत्री के गढ़ में ट्रांसपोर्ट सेवा की बदहाली और लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।
