
10.97% रहा कुल परिणाम
मुंबई। देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) फाइनल परीक्षा का परिणाम सोमवार को घोषित कर दिया गया। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा जारी नतीजों के अनुसार इस बार कुल परिणाम 10.97 प्रतिशत रहा, जिससे एक बार फिर परीक्षा के उच्च स्तर और कठिन प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस वर्ष जनवरी में आयोजित परीक्षा में देशभर से 69,591 विद्यार्थियों ने भाग लिया था। इनमें से 2,445 अभ्यर्थी दोनों समूहों में उत्तीर्ण घोषित किए गए। परीक्षा भारत सहित विदेशों में कुल 576 केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
इस बार हरियाणा के करनाल की दीक्षा गोयल ने 600 में से 486 अंक प्राप्त कर देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया। उन्हें 81 प्रतिशत अंक मिले, जो इस परीक्षा की कठिनता को देखते हुए अत्यंत उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। दीक्षा की इस सफलता से करनाल शहर में खुशी की लहर है।
दूसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब के अनिरुद्ध गर्ग रहे, जिन्होंने 452 अंक प्राप्त किए। वहीं नई दिल्ली के ऋषभ जैन और हरियाणा के सोनीपत के ध्रुव देंबला ने समान अंक हासिल कर संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया।
आंकड़ों के अनुसार ग्रुप-1 में 53,652 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 11,282 विद्यार्थी सफल रहे। इस प्रकार ग्रुप-1 का परिणाम 21.03 प्रतिशत रहा, जो अपेक्षाकृत संतोषजनक माना जा रहा है। वहीं ग्रुप-2 में 38,169 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से केवल 3,726 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। ग्रुप-2 का परिणाम 9.76 प्रतिशत रहा, जो अन्य की तुलना में काफी कम है।
दोनों समूहों की परीक्षा एक साथ देने वाले 22,293 विद्यार्थियों में से 2,446 अभ्यर्थी सफल हुए, जो कुल 10.97 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों समूहों को एक साथ उत्तीर्ण करना अब भी विद्यार्थियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
आईसीएआई के अध्यक्ष सीए प्रसन्न कुमार ने सफल विद्यार्थियों, उनके शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि सीए परीक्षा अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन विद्यार्थी अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण से इसे पार कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सनदी लेखापाल उच्च नैतिक मूल्यों और पेशेवर प्रतिबद्धता के साथ देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर परिणाम यह दर्शाता है कि सीए फाइनल परीक्षा का स्तर अब भी बेहद कठिन है, लेकिन सीमित सफलता प्रतिशत के बावजूद प्रतिभाशाली और परिश्रमी विद्यार्थी अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहे हैं।