
मुंबई। पूर्वी उपनगर के गोवंडी इलाके में झोपड़ी पर की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद एक झोपड़ी मालिक की कथित रूप से सदमे से मौत होने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और दो दिन तक विरोध प्रदर्शन किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए देवनार पुलिस ने बिल्डर और झोपड़ी समिति के सदस्यों सहित कुल छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार निबोनी बाग, गोवंडी क्षेत्र में वर्ष 2006 से स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) की झोपड़पट्टी पुनर्विकास योजना लागू है। इस योजना के तहत कुछ वर्ष पहले इलाके की कई झोपड़ियों को हटाकर बहुमंजिला इमारतों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि अभी भी इस क्षेत्र में कई झोपड़ियां मौजूद हैं। इसी कारण एसआरए की ओर से हाल ही में शेष झोपड़ीधारकों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने का निर्देश दिया गया था।
इसी क्षेत्र में रहने वाले 60 वर्षीय अनिल पगारे भी प्रभावित झोपड़ीधारकों में शामिल थे। उन्हें भी झोपड़ी खाली करने के लिए नोटिस मिला था। परिवार के मुताबिक पगारे ने अधिकारियों और संबंधित लोगों से आग्रह किया था कि उनकी बेटी की परीक्षा चल रही है, इसलिए झोपड़ी खाली करने के लिए उन्हें कम से कम एक महीने की मोहलत दी जाए।
परिजनों का आरोप है कि उनकी गुहार पर ध्यान नहीं दिया गया और 5 मार्च को अचानक उनकी झोपड़ी पर तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई। बताया जाता है कि कार्रवाई के दौरान भी पगारे ने बिल्डर और समिति के सदस्यों से कुछ दिन का समय देने की अपील की थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई और झोपड़ी गिरा दी गई।
झोपड़ी ढहने के बाद अनिल पगारे और उनकी पत्नी ने पूरे दिन मलबे में बिखरे अपने सामान को समेटने और सुरक्षित करने का प्रयास किया। परिवार के लोगों के अनुसार इस घटना से वे काफी मानसिक तनाव में थे। शाम के समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तुरंत राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक रूप से हृदयाघात को मौत का कारण बताया है।
घटना के बाद स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पगारे की मौत के लिए बिल्डर और समिति के सदस्यों को जिम्मेदार ठहराया। इसके विरोध में क्षेत्र के लोगों ने लगातार दो दिनों तक देवनार पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों के बढ़ते दबाव और विरोध के बाद पुलिस ने रविवार देर रात बिल्डर तथा झोपड़ी समिति के सदस्यों समेत कुल छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने झोपड़पट्टी पुनर्विकास परियोजनाओं के दौरान मानवीय पहलुओं और विस्थापन से जुड़ी समस्याओं को एक बार फिर सामने ला दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था देना भी उतना ही आवश्यक है। पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी है।