Home ताजा खबरसंजय गांधी नेशनल पार्क के अतिक्रमणधारकों के पुनर्वास पर जल्द बड़ा फैसला, 2,200 परिवारों को घर देने की योजना

संजय गांधी नेशनल पार्क के अतिक्रमणधारकों के पुनर्वास पर जल्द बड़ा फैसला, 2,200 परिवारों को घर देने की योजना

by trilokvivechana
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मुंबई : संजय गांधी नेशनल पार्क क्षेत्र में वर्षों से रह रहे अतिक्रमणधारकों के पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार जल्द ही बड़ा और व्यापक निर्णय लेने की तैयारी में है। यह जानकारी महाराष्ट्र के वन मंत्री Ganesh Naik ने विधान परिषद में दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे को चरणबद्ध तरीके से सुलझाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।

विधान परिषद में यह विषय सदस्य Pravin Darekar द्वारा उठाई गई ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से सामने आया। इस पर जवाब देते हुए मंत्री नाईक ने बताया कि नेशनल पार्क क्षेत्र में रहने वाले लोगों के दावों की जांच की जा रही है और पात्र लोगों के पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

मंत्री के अनुसार पुनर्वास प्रक्रिया को दो चरणों में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में 11,359 अतिक्रमणधारकों के दावों की जांच की गई। जांच के बाद इनमें से 299 लोगों को पात्र माना गया है, हालांकि उनका पुनर्वास अभी तक पूरा नहीं हो सका है। सरकार अब इन पात्र परिवारों को जल्द से जल्द बसाने के लिए नई योजना तैयार कर रही है।

दूसरे चरण में 13,486 अतिक्रमणधारकों के मामलों की जांच और पात्रता का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जा रही है ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को ही पुनर्वास का लाभ मिल सके।

सरकार ने पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण योजना भी तैयार की है। इसके तहत Aarey Colony क्षेत्र में करीब 20 एकड़ जमीन पर आदिवासी परिवारों के लिए घर बनाने का प्रस्ताव है। यहां ‘ग्राउंड प्लस वन’ मॉडल के मकान बनाए जाएंगे, जिनमें लगभग 2,200 परिवारों को बसाया जा सकेगा। इस योजना का उद्देश्य नेशनल पार्क क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराना है।

वन मंत्री ने बताया कि इस योजना को अंतिम रूप देने और पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे, ताकि सभी जरूरी निर्णय तेजी से लिए जा सकें।

मंत्री नाईक ने यह भी स्पष्ट किया कि नेशनल पार्क के बाहर स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी नहीं की जाएगी। पानी की आपूर्ति, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की मरम्मत या सुधार के काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश देने की भी बात उन्होंने कही।

विधान परिषद में इस मुद्दे पर हुई चर्चा में कई अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया। इसमें Anil Parab, Chitra Wagh, Rajesh Rathod और Manisha Kayande ने भी अपने विचार रखे और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की आवश्यकता पर जोर दिया।

सरकार का कहना है कि पुनर्वास की इस योजना से हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सकेगा, साथ ही नेशनल पार्क क्षेत्र की पर्यावरणीय सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

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