Home ताजा खबरसनातन संगम: एकमत्व का उत्सव मरोल में धूमधाम से संपन्न

सनातन संगम: एकमत्व का उत्सव मरोल में धूमधाम से संपन्न

by trilokvivechana
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मुंबई के मरोल स्थित वसंत ओएसिस बीएमसी ग्राउंड में “सनातन संगम: एकमत्व का उत्सव” का भव्य आयोजन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। इस सामुदायिक समारोह में वसंत ओएसिस तथा आसपास के क्षेत्रों से लगभग 1500 से अधिक लोगों ने भाग लेकर सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश मजबूत किया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना और विभिन्न समुदायों के बीच एकता की भावना को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक ढोल की गूंज के साथ हुई, जिसने पूरे वातावरण को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया। इसके बाद बाल गोकुलम के बच्चों ने अपनी रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। बच्चों ने भक्तिपूर्ण नृत्य, “वंदे मातरम्” की प्रस्तुति और “हनुमान चालीसा” के सामूहिक गायन के माध्यम से भारतीय संस्कृति और भक्ति भावना को जीवंत कर दिया। इसके अलावा बच्चों द्वारा प्रस्तुत एक प्रभावशाली सामाजिक नाटक ने समाज में एकता, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व को दर्शाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय मंत्री Smriti Irani ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में भारत की सांस्कृतिक पहचान और दुर्गा शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने और नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर International Society for Krishna Consciousness के पूज्य श्री प्रभु केशव चंद्र जी ने भक्ति और आध्यात्मिकता के माध्यम से समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं जैन संत मुनि नीलेश चंद्र जी महाराज ने सनातन परंपराओं की महत्ता बताते हुए अनुयायियों से एकजुट होकर समाज और संस्कृति की रक्षा करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ विचारक Sunil Deodhar ने हिंदुत्व की विचारधारा और उसके भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से भारत की सनातन परंपरा को और सशक्त बनाया जा सकता है।
पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। “सनातन संगम: एकमत्व का उत्सव” ने न केवल लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम किया, बल्कि समाज में सामूहिकता और सद्भाव की भावना को भी मजबूत किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने इस तरह के आयोजनों को आगे भी जारी रखने की इच्छा व्यक्त

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