Home ताजा खबरक्या घर-घर फिर से जलेंगे केरोसिन के चूल्हे? एलपीजी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला…

क्या घर-घर फिर से जलेंगे केरोसिन के चूल्हे? एलपीजी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला…

by trilokvivechana
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मुंबई : राज्यभर में एलपीजी गैस की कमी के बीच, जहां लोग गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं और होटल, चाय तथा नाश्ते के स्टॉल गैस के अभाव में बंद हो रहे हैं, वहीं नागरी आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री छगन भुजबल ने दावा किया कि राज्य में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है। उन्होंने विधान परिषद में घोषणा की कि सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर केरोसिन बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

विधान परिषद में अभिजीत वंजारी द्वारा नियम 93 के तहत उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए भुजबल ने कहा कि राज्य में एलपीजी की आपूर्ति सुचारू है।

उन्होंने बताया कि एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने और कालाबाजारी रोकने के लिए जिला स्तर पर सतर्कता दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारियों और क्षेत्रीय अधिकारियों को गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति के कारण ईंधन आपूर्ति पर दबाव की संभावना को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने एलपीजी आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति, नियंत्रण और मूल्य निर्धारण की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। इसी के तहत 5 मार्च को तेल कंपनियों को निर्देश दिया गया कि एलपीजी की आपूर्ति मुख्य रूप से घरेलू उपयोग के लिए सुनिश्चित की जाए।

एलपीजी के विकल्प के रूप में केरोसिन वितरण का विकल्प भी राज्य सरकार के विचाराधीन है। इस संबंध में 11 मार्च को नागपुर खंडपीठ को जानकारी दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर केरोसिन बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

एलपीजी आपूर्ति की समीक्षा के लिए 12 मार्च को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। केंद्र सरकार ने शेष व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के वितरण का अधिकार राज्य सरकार को दिया है। इसके अनुसार जिलों में व्यावसायिक गैस के उपयोग को ध्यान में रखते हुए शेष व्यावसायिक एलपीजी का वितरण प्राथमिक क्षेत्रों में करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, श्मशान घाटों, वृद्धाश्रमों और अनाथाश्रमों को 100 प्रतिशत आपूर्ति दी जा रही है।

रक्षा, सरकारी विभाग, रेलवे, विमानन, पुलिस और जेलों के कैंटीनों को 70 प्रतिशत तथा महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम की कैंटीनों, औषधि उद्योग, बीज प्रसंस्करण और मत्स्य पालन क्षेत्र को 50 प्रतिशत आपूर्ति की जा रही है। तेल कंपनियों और गैस वितरकों के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं तथा एलपीजी आपूर्ति पर दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

घरेलू सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि
केंद्र सरकार ने 7 मार्च से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ाकर 852.50 रुपये से 912.50 रुपये कर दी है। व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत भी 1720.50 रुपये से बढ़ाकर 1835 रुपये कर दी गई है। घरेलू एलपीजी की आपूर्ति में बाधा न आए और समन्वय बना रहे, इसके लिए राज्य सरकार ने जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित की हैं।

राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय किया गया है। जिला स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों की एलपीजी संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए सरकार ने व्हाट्सएप नंबर जारी किया है।

पुलिस सुरक्षा में गैस परिवहन
रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन 9 हजार टन से बढ़ाकर 11 हजार टन किया गया है। जिला स्तर पर विशेष समितियां और नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं तथा तेल कंपनियों और गैस वितरकों के साथ नियमित बैठकें हो रही हैं। एलपीजी बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवा की तकनीकी समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन और वितरण के लिए पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

खाद्य तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि
युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण खाद्य तेलों की कीमतों में हल्की वृद्धि हुई है। फरवरी की तुलना में मार्च में औसतन प्रति किलो चार से छह रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है। मूंगफली तेल 188.21 से बढ़कर 194.32 रुपये, सरसों तेल 200.67 से 204.22 रुपये, वनस्पति तेल 160.47 से 160.63 रुपये, सोयाबीन तेल 153.63 से 159.32 रुपये, सूरजमुखी तेल 172.16 से 178.05 रुपये और पाम तेल 145.60 से बढ़कर 148.60 रुपये हो गया है।

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