
मुंबई: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडकी बहिन योजना’ को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए लाभार्थियों के सत्यापन अभियान को तेज कर दिया है। हाल के दिनों में सामने आई अनियमितताओं और फर्जी लाभार्थियों की शिकायतों के बाद सरकार ने सभी पंजीकृत महिलाओं के लिए केवाईसी (KYC) प्रक्रिया अनिवार्य कर दी है। इसके तहत 30 अप्रैल को अंतिम तिथि तय की गई है, जिसके बाद सत्यापन अधूरा रहने पर मासिक 1500 रुपये की सहायता राशि रोक दी जाएगी।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को वित्तीय संबल प्रदान करना है, ताकि वे अपने परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा कर सकें। लेकिन जांच में यह सामने आया है कि कई मामलों में अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए सत्यापन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है।प्रशासन का कहना है कि केवाईसी के जरिए लाभार्थियों की पहचान और पात्रता की पुष्टि की जाएगी। इसके लिए महिलाओं को अपने आधार कार्ड, बैंक खाते और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी अपडेट करनी होगी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा कराएं।अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो लाभार्थी निर्धारित समयसीमा के भीतर केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं करेंगे, उनके खातों में आने वाली सहायता राशि अस्थायी रूप से निलंबित कर दी जाएगी। हालांकि, बाद में सत्यापन पूरा होने पर भुगतान दोबारा शुरू किया जा सकता है। लेकिन इसमें देरी होने की स्थिति में लाभार्थियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।सरकार ने महिलाओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और समय रहते अपने नजदीकी सेवा केंद्र, महा-ई-सेवा केंद्र या अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें। साथ ही, यह भी चेतावनी दी गई है कि किसी भी अनधिकृत एजेंट या दलाल के झांसे में न आएं और केवल सरकारी माध्यमों का ही उपयोग करें।विभागीय अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में योजना की निगरानी और अधिक कड़ी की जाएगी। नियमित ऑडिट और डिजिटल सत्यापन के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल पात्र महिलाओं को ही लाभ मिले और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम योजना की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वास्तविक लाभार्थियों को किसी तरह की तकनीकी या प्रक्रियागत बाधाओं का सामना न करना पड़े। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह जागरूकता फैलाने के साथ-साथ प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाए।फिलहाल, 30 अप्रैल की समयसीमा को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है और लाभार्थियों से समय पर कार्रवाई करने की अपील की जा रही है, ताकि किसी भी पात्र महिला को योजना के लाभ से वंचित न होना पड़े।