‘अमृत भारत’ या ‘अव्यवस्था’ एक्सप्रेस? प्यास से जूझते यात्री, सुविधाओं पर उठे सवाल

लखनऊ: देश में आधुनिक रेल सेवाओं और हाईस्पीड ट्रेनों के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ से उतरे यात्रियों ने पानी की भारी किल्लत को लेकर तीखी नाराजगी जताई। यात्रियों का आरोप है कि उन्हें लगभग 12 घंटे तक पीने के लिए सामान्य पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों को बुनियादी सुविधा के रूप में पानी तक नहीं मिला, जिससे खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा। जब ट्रेन चारबाग स्टेशन पहुंची तो आक्रोशित यात्रियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। कई यात्रियों ने बताया कि यात्रा के दौरान बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

यह घटना उस समय सामने आई है, जब देश में बुलेट ट्रेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स और आधुनिक रेल सेवाओं का प्रचार किया जा रहा है। ऐसे में आम यात्रियों का कहना है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित नहीं होंगी, तब तक इन योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे को केवल नई ट्रेनों की शुरुआत या नामकरण पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए। यात्रियों को स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और सुरक्षित यात्रा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

इधर, भीषण गर्मी ने रेल यात्राओं को और अधिक कठिन बना दिया है। तेजस एक्सप्रेस और गरीब रथ एक्सप्रेस में भी एसी खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं। यात्रियों का कहना है कि लंबे सफर के दौरान एसी ठीक से काम नहीं कर रहा, जिससे उन्हें उमस और गर्मी में सफर करने को मजबूर होना पड़ा।

एक यात्री ने बताया कि वह 82501 तेजस एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे, लेकिन पूरी यात्रा के दौरान एसी ने सही तरीके से काम नहीं किया। उन्होंने इस असुविधा के लिए रिफंड की मांग की है। इसी तरह वापसी की ट्रेन 82502 में भी यात्रियों ने ऐसी ही शिकायतें दर्ज कराई हैं।

इन घटनाओं ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समय पर समाधान नहीं मिलना सबसे बड़ी समस्या है।

फिलहाल, इन घटनाओं के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या रेलवे की प्राथमिकताओं में बुनियादी जरूरतें पीछे छूटती जा रही हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाएगा, ताकि यात्रा सुरक्षित, आरामदायक और भरोसेमंद बन सके।

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