
मुंबई: भीषण गर्मी और कमजोर मानसून की आशंका के बीच महानगर पर पानी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने हालात को भांपते हुए पानी की आपूर्ति में कटौती की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, 15 मई से ही शहर में 5 से 15 प्रतिशत तक जल आपूर्ति घटाई जा सकती है, ताकि आने वाले महीनों में गंभीर संकट से बचा जा सके। बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया जा रहा है। मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली झीलों में जल स्तर तेजी से गिर रहा है। यदि मौजूदा दर से पानी की सप्लाई जारी रही, तो उपलब्ध भंडार जुलाई के अंत तक ही सीमित रह सकता है। ऐसे में कटौती के जरिए पानी का स्टॉक अगस्त तक बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई है।
झीलों में घटता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता
मुंबई की जल आपूर्ति पूरी तरह सात प्रमुख झीलों पर निर्भर है, जिनकी कुल भंडारण क्षमता करीब 14.47 लाख मिलियन लीटर है। वर्तमान में इन झीलों में केवल लगभग 29 प्रतिशत पानी बचा है, जो करीब 4.16 लाख मिलियन लीटर के बराबर है। यह आंकड़ा सामान्य स्थिति से काफी कम है और आने वाले दिनों में संकट गहरा सकता है। फिलहाल शहर को प्रतिदिन लगभग 3,850 मिलियन लीटर पानी मिल रहा है, जबकि जरूरत करीब 4,300 मिलियन लीटर की है। यानी पहले से ही 450 एमएलडी की कमी बनी हुई है।
कमजोर मानसून और अल नीनो का असर
भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही संकेत दिया है कि वर्ष 2026 का मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसके साथ ही एल नीनो का प्रभाव भी देखने को मिल सकता है, जिससे बारिश देर से और कम होने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च तापमान के कारण जल स्रोतों का वाष्पीकरण तेजी से हो रहा है। यानी एक ओर झीलों में पानी भरने में देरी होगी, वहीं उपलब्ध पानी भी तेजी से कम हो सकता है।
पहले भी अपनाया जा चुका है यह कदम
बीएमसी इससे पहले भी 2023 और 2024 में इसी तरह की स्थिति में 10 प्रतिशत तक पानी कटौती लागू कर चुकी है। हालांकि इस बार प्रशासन पहले से ही सतर्क नजर आ रहा है और समय रहते कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
लक्ष्य—संकट से पहले नियंत्रण
अधिकारियों का कहना है कि अभी थोड़ी कटौती कर भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। जब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक जल प्रबंधन को सख्ती से लागू करना जरूरी है। मुंबईवासियों के लिए यह साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा। यदि मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो यह संकट और गहरा सकता है।