Home राजनीतिराज्यउत्तर प्रदेशफर्जी आईएएस बनकर ठगी का जाल: तीन बहनें गिरफ्तार, नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी

फर्जी आईएएस बनकर ठगी का जाल: तीन बहनें गिरफ्तार, नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी

by trilokvivechana
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लखनऊ/बरेली। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को झांसा देने वाली विप्रा शर्मा और उसकी दो बहनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस मामले ने एक बार फिर बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की चाह में ठगे जा रहे युवाओं की हकीकत उजागर कर दी है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा खुद को कभी एसडीएम तो कभी एडीएम बताकर लोगों का भरोसा जीतती थी। वह यूपीएससी में चयनित नहीं हो सकी थी, जिसके बाद उसने ठगी का रास्ता अपना लिया। धीरे-धीरे उसने अपनी बड़ी बहन शिखा पाठक और ममेरी बहन दीक्षा को भी इस अवैध धंधे में शामिल कर लिया। तीनों मिलकर संगठित तरीके से नौकरी दिलाने का झांसा देतीं और अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलती थीं।

बारादरी थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लायल वर्ष 2022 में शिखा पाठक के संपर्क में आई थीं। शिखा ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उसकी बहन विप्रा शर्मा एक अधिकारी है और यूपीएसएसएससी के माध्यम से निकलने वाली कंप्यूटर ऑपरेटर की भर्ती में आसानी से नौकरी दिलवा सकती है। इस झांसे में आकर प्रीति ने अपने परिचितों को भी इस योजना के बारे में बताया।

इसके बाद प्रीति लायल अपने साथियों आदिल खान, मुशाहिद अली और संतोष कुमार के साथ आरोपियों से मिलने पहुंचीं। आरोप है कि विप्रा शर्मा और उसके पिता विरेंद्र कुमार शर्मा ने सभी को सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया और बदले में लाखों रुपये वसूल लिए। अलग-अलग लोगों से दो लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक की रकम ली गई।

कुछ समय बाद आरोपियों ने राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर अभ्यर्थियों को सौंप दिए। इन पत्रों पर वरिष्ठ अधिकारियों के नाम से नकली हस्ताक्षर किए गए थे। जब अभ्यर्थियों ने दस्तावेजों की सत्यता की जांच कराई, तो पूरा मामला फर्जी निकला और उनके साथ हुई ठगी का खुलासा हुआ।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विप्रा शर्मा और शिखा पाठक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में ममेरी बहन दीक्षा का नाम सामने आने पर उसे भी हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों से 55 लाख रुपये फ्रीज किए हैं और करीब 4.5 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।

फिलहाल तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में आने से पहले पूरी जांच पड़ताल जरूरी है।

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