आधार कार्ड असली, पत्नी निकली नकली!, प्रेमिका संग होटल में ठहरने के लिए पति ने पत्नी की पहचान का किया कथित दुरुपयोग

मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक पति पर आरोप लगा है कि उसने अपनी प्रेमिका को पत्नी बताकर होटल में ठहराया और इसके लिए अपनी असली पत्नी के आधार कार्ड तथा पहचान संबंधी दस्तावेजों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया। मामला उजागर होने के बाद बांद्रा पुलिस ने जांच तेज कर दी है।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित महिला ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसकी जानकारी और अनुमति के बिना उसके नाम और आधार कार्ड का उपयोग कर मुंबई के एक होटल में कमरा बुक कराया। होटल के रिकॉर्ड में आरोपी के साथ मौजूद दूसरी महिला को उसकी पत्नी के रूप में दर्ज किया गया था। घटना सामने आने के बाद परिवार और सामाजिक दायरे में भी हड़कंप मच गया है।

प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, महिला की शादी वर्ष २०१३ में दीपक गोयल (काल्पनिक नाम) से हुई थी। पिछले कई वर्षों से दोनों के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया सूरत की अदालत में जारी है। यह मामला २० फरवरी २०२६ से न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस को बताया कि १४ अप्रैल २०२६ को वह मुंबई आई थी। इसी दौरान उसके वकील ने फोन कर पूछा कि क्या उसने अपने पति के साथ समझौता कर लिया है। महिला के इनकार करने पर वकील ने जानकारी दी कि उसके पति को एक होटल में दूसरी महिला के साथ देखा गया है।

इसके बाद महिला ने संबंधित होटल से संपर्क किया। होटल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी में सामने आया कि १६ से १८ फरवरी २०२६ के बीच दीपक गोयल और उसकी कथित पत्नी के नाम पर एक सुइट बुक किया गया था। होटल रिकॉर्ड के अनुसार दोनों ने वहां चेक-इन भी किया था।

प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि पहचान छिपाने और होटल में प्रवेश पाने के लिए आधार कार्ड का कथित रूप से फर्जी इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब होटल के दस्तावेज, पहचान रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

बांद्रा पुलिस ने आरोपी पति और अज्ञात महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल वैवाहिक विश्वास को झकझोरने वाला है, बल्कि पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग और निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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