आदिवासी युवाओं को उच्च शिक्षा की नई उड़ान, महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों में खुलेंगे आधुनिक आदिवासी अध्ययन केंद्र, अनुसंधान और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी समाज के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों में अब विशेष आदिवासी अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने कहा कि यह पहल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आदिवासी युवाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इन केंद्रों के विस्तार, वित्तीय सहायता और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने की। इस दौरान आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक वुईके, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी, उच्च शिक्षा संचालक डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर, आदिवासी विकास विभाग के सहसचिव मच्छिंद्र शेळके सहित मुंबई, जलगांव, नांदेड़, अमरावती और गडचिरोली विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद रहे।

मंत्री पाटील ने जानकारी दी कि जलगांव, नांदेड़ और मुंबई विश्वविद्यालयों में आदिवासी अध्ययन केंद्र पहले से संचालित हो रहे हैं, जबकि अब अमरावती और गडचिरोली विश्वविद्यालयों में भी नए केंद्र शुरू किए जाएंगे। इन केंद्रों की स्थापना और विकास के लिए आदिवासी विकास विभाग की ओर से तीन करोड़ रुपये की विशेष निधि उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि शोध कार्यों, अधोसंरचना निर्माण, अध्ययन सामग्री और विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों पर खर्च की जाएगी।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा देना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, भाषाओं, इतिहास और जीवनशैली को संरक्षित करना भी है। इन केंद्रों में सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक विकास, वनाधिकार, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय संसाधनों से जुड़े विषयों पर विशेष अनुसंधान किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित अध्ययन सामग्री, कौशल प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक वुईके ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन अध्ययन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को न केवल उच्च शिक्षा में बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि रोजगार और शोध के नए रास्ते भी खुलेंगे।

शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यह पहल आदिवासी क्षेत्रों में शैक्षणिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का मजबूत माध्यम साबित हो सकती है। सरकार का यह कदम आदिवासी विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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