उल्हासनगर में बाल काटे, चप्पलों की माला पहनाकर निकाली गई दो किलोमीटर लंबी परेड; पुलिस की नरमी पर उठे तीखे सवाल
महाराष्ट्र को हमेशा सामाजिक सुधार और प्रगतिशील सोच की धरती माना जाता रहा है, लेकिन उल्हासनगर से सामने आई एक भयावह घटना ने इस छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है। कानून और संविधान की बात करने वाले समाज में आज भी जात पंचायतों का दबदबा किस कदर कायम है, इसका शर्मनाक उदाहरण विठ्ठलवाड़ी इलाके में देखने को मिला, जहां कथित तौर पर जात पंचायत का आदेश न मानने पर महिलाओं को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
घटना इतनी अमानवीय थी कि जिसने भी इसके बारे में सुना, वह सन्न रह गया। महिलाओं के बाल काटे गए, उनके गले में चप्पलों की माला पहनाई गई और मारपीट करते हुए करीब दो किलोमीटर तक पूरे इलाके में घुमाया गया। इस घटना के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है। वहीं पुलिस की कार्रवाई और उसकी कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मंदिर प्रवेश को लेकर भड़का विवाद
जानकारी के अनुसार, यह विवाद स्थानीय वाघेरी और राजपूत परिवारों के बीच लंबे समय से चल रहे सामाजिक तनाव से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इलाके की जात पंचायत ने राजपूत परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था।
हालांकि राजपूत परिवार के एक युवक ने इस फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसका विरोध किया। उसने सवाल उठाया कि बिना किसी गलती के परिवार को समाज से अलग क्यों किया जा रहा है। इसी विरोध के बीच वह मंदिर में आयोजित भंडारे में शामिल होने पहुंच गया। युवक का मंदिर पहुंचना जात पंचायत के आदेश की अवहेलना माना गया और इसी बात से विवाद हिंसक हो उठा।
घर पर हमला, महिलाओं को सड़क पर घसीटा
गुरुवार शाम को कथित तौर पर वाघेरी समुदाय के कुछ लोगों ने राजपूत परिवार के घर पर धावा बोल दिया। पहले घर पर पथराव किया गया और फिर घर की महिलाओं को जबरन बाहर खींचकर सड़क पर लाया गया।
इसके बाद महिलाओं के साथ जो व्यवहार किया गया, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। गीता प्रेम राजपूत, राज राजपूत, सुनील राजपूत समेत अन्य महिलाओं के बाल काट दिए गए। उनके गले में चप्पलों की माला डालकर उन्हें लात-घूंसों से पीटा गया और पूरे इलाके में अपमानजनक तरीके से घुमाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह जुलूस करीब दो किलोमीटर तक निकाला गया।
सबसे दुखद पहलू यह रहा कि घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद थे, लेकिन किसी ने आगे बढ़कर महिलाओं को बचाने की कोशिश नहीं की। लोग तमाशबीन बने रहे और महिलाओं पर अत्याचार होता रहा।
अस्पताल में भर्ती पीड़ित महिलाएं
घटना में घायल महिलाओं को तुरंत उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार महिलाओं को शारीरिक चोटों के साथ गहरा मानसिक आघात भी पहुंचा है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
इतनी गंभीर घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई भी विवादों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि पुलिस ने मामले में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई और आरोपियों पर हल्की धाराएं लगाईं। पीड़ित परिवार का कहना है कि महिलाओं के साथ हुई बर्बरता और जात पंचायत के दबाव जैसे गंभीर पहलुओं को नजरअंदाज किया गया।
मामले में जुली वाघरी, मटकी वाघरी, विनू आगरी समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालांकि अब तक केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि बाकी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर संविधान और कानून से ऊपर खुद को मानने वाली जात पंचायतों पर लगाम कब लगेगी और महिलाओं की गरिमा व सुरक्षा को लेकर प्रशासन कब तक केवल दावे करता रहेगा।