
मुंबई। मध्य रेल की प्रतिष्ठित पहचान और मुंबई-पुणे के बीच सफर का पर्याय बन चुकी डेक्कन क्वीन ने 1 जून 2026 को अपनी सेवा के गौरवशाली 97वें वर्ष में प्रवेश कर लिया। लगभग एक सदी से यात्रियों का भरोसा जीतती आ रही यह ऐतिहासिक ट्रेन आज भी समयपालन, उत्कृष्ट सेवा और अपनी विशिष्ट विरासत के कारण भारतीय रेल की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में शुमार है।
वर्ष 1930 में 1 जून के दिन मुंबई और पुणे के बीच तेज, आरामदायक और आधुनिक रेल सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डेक्कन क्वीन की शुरुआत की गई थी। उस समय यह देश की पहली डीलक्स ट्रेन मानी जाती थी। अपनी शान, रफ्तार और विशेष सुविधाओं के कारण इसे ‘दक्कन की रानी’ का नाम दिया गया, जो आज भी इसकी पहचान बना हुआ है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर पुणे रेलवे स्टेशन और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। रंग-बिरंगी पुष्प सज्जा से सजी डेक्कन क्वीन का स्वागत यात्रियों, रेलवे अधिकारियों और रेल प्रेमियों ने उत्साह के साथ किया। समारोह के दौरान केक काटकर ट्रेन की वर्षगांठ मनाई गई और उसके गौरवशाली इतिहास को याद किया गया।
रेल प्रशासन ने यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए हाल के वर्षों में ट्रेन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। डाइनिंग कार का आधुनिकीकरण किया गया है, जबकि उसकी ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक स्वरूप को भी सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा शौचालयों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है तथा कोचों के आंतरिक हिस्सों को नई थीम और आकर्षक डिज़ाइन के साथ विकसित किया गया है।
डेक्कन क्वीन केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि भारतीय रेल के विकास की गवाह भी रही है। इसके नाम कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हैं। यह भारत की पहली ऐसी ट्रेनों में शामिल रही, जिसमें रोलर बेयरिंग कोच, सेल्फ-जनरेटिंग कोच तथा प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी चेयर कार जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू की गई थीं। आज भी यह देश की एकमात्र ऐसी ट्रेन मानी जाती है, जिसमें यात्रियों को डाइनिंग कार में टेबल सर्विस की सुविधा उपलब्ध है।
वर्तमान में विस्टाडोम कोच, एलएचबी रेक और आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस डेक्कन क्वीन तकनीक और विरासत का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है। वर्षों से लाखों यात्रियों की यादों, भावनाओं और दैनिक जीवन का हिस्सा बनी यह ट्रेन केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की रेल संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
97वें वर्ष में प्रवेश के साथ डेक्कन क्वीन एक बार फिर यह साबित कर रही है कि समय बदल सकता है, तकनीक बदल सकती है, लेकिन भरोसे और परंपरा की पहचान कभी पुरानी नहीं होती।