
मुंबई। दक्षिण मुंबई के कोलाबा क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक ससून डॉक को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल फिशिंग हार्बर के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल शुरू की है। प्रस्तावित परियोजना के तहत बंदरगाह में अत्याधुनिक तकनीक, स्वच्छता प्रबंधन और मछली व्यापार के लिए उन्नत सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे मछुआरों की आजीविका और समुद्री अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने कहा कि ससून डॉक देश के प्रमुख मछली बंदरगाहों में से एक है और महाराष्ट्र की मत्स्य अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि आधुनिकीकरण योजना के तहत इस बंदरगाह को आधुनिक तकनीक और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे यहां की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।
परियोजना के क्रियान्वयन में फिनलैंड की कंपनियां Helvar, Miracis और RiverRecycle सहयोग करेंगी। इनके माध्यम से ऊर्जा-कुशल स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम, एआई आधारित निगरानी व्यवस्था, मछली पकड़ने वाले जालों के पुनर्चक्रण और समुद्री पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई नवाचार लागू किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1875 में स्थापित ससून डॉक मुंबई के सबसे पुराने और व्यस्त मछली बंदरगाहों में से एक है। आधुनिकीकरण के बाद यहां स्वच्छता, सुरक्षा, मछली हैंडलिंग, कोल्ड स्टोरेज और व्यापारिक सुविधाओं में व्यापक सुधार की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल मछली व्यापार को नई गति मिलेगी, बल्कि मछुआरों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। साथ ही ससून डॉक को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल फिशिंग हार्बर के रूप में विकसित किया जा सकेगा।