
मुंबई। मायानगरी मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी में लोकल ट्रेनें लाखों लोगों की रोजमर्रा की जीवनरेखा मानी जाती हैं। हर दिन भीड़ से खचाखच भरी ट्रेनों में सफर करना आम यात्रियों के लिए ही चुनौती बना रहता है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सफर लंबे समय से परेशानी और असुरक्षा का कारण बना हुआ था। अब बुजुर्ग यात्रियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। पश्चिम रेलवे ने मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद लोकल ट्रेनों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग डिब्बों की व्यवस्था तेज कर दी है।
रेलवे प्रशासन के अनुसार, फिलहाल ४० लोकल ट्रेनों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष डिब्बों की सुविधा शुरू कर दी गई है। वहीं अगले १० महीनों में बाकी ६५ ट्रेनों में भी यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। चालू वित्त वर्ष के भीतर पश्चिम रेलवे की सभी १०५ लोकल ट्रेनों में बुजुर्ग यात्रियों के लिए अलग डिब्बे उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
दरअसल, सुबह और शाम के व्यस्त समय में लोकल ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ के कारण वरिष्ठ नागरिकों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार धक्का-मुक्की और अव्यवस्था के चलते हादसों की आशंका भी बनी रहती थी। इसी समस्या को लेकर बांद्रा निवासी के. पी. पुरुषोत्तम्म नायर ने मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रेलवे बोर्ड को वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग डिब्बों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने बताया कि चर्चगेट की ओर जाने वाली लोकल ट्रेनों का सातवां डिब्बा वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित रहेगा। प्रत्येक डिब्बे में २७ सीटों की व्यवस्था की जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए डिब्बों और प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट रूप से ‘वरिष्ठ नागरिक डिब्बा’ लिखा जाएगा, ताकि बुजुर्ग यात्रियों को पहचानने और पहुंचने में आसानी हो।
रेलवे प्रशासन के मुताबिक इस पूरी परियोजना पर लगभग ४.६ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हालांकि यात्री संगठनों का कहना है कि केवल अलग डिब्बे बना देना पर्याप्त नहीं होगा। कई रेलवे स्टेशनों पर अब भी रैंप, एस्केलेटर और दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। संगठनों ने मांग की है कि बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए स्टेशन परिसरों को भी जल्द अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाए।
मुंबई की भागदौड़ के बीच यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मानजनक और धक्कामुक्त सफर की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।