
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के स्कूलों के स्थानांतरण को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों की शिफ्टिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई नीति लागू की गई है। इस नीति के तहत अब केवल विशेष परिस्थितियों में ही स्कूलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति दी जाएगी। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। राज्य में वर्तमान समय में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, अनुदानित, गैर-अनुदानित और स्वयं वित्तपोषित मिलाकर एक लाख से अधिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। ऐसे में स्कूलों के अनियंत्रित स्थानांतरण को रोकने और स्पष्ट नियम तय करने के लिए यह नीति तैयार की गई है।
किन परिस्थितियों में मिलेगी शिफ्टिंग की अनुमति
नई गाइडलाइन के अनुसार यदि किसी स्कूल की इमारत जर्जर और खतरनाक हो गई है, वह किसी सरकारी परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में आती है, वहां पर्याप्त भौतिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, किरायानामा समाप्त हो गया है या स्कूल किराए की इमारत से खुद की इमारत में जाना चाहता है, तो ऐसे मामलों में स्थानांतरण की मंजूरी दी जा सकेगी। इसके अलावा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि छात्र संख्या बढ़ने के कारण मौजूदा परिसर छोटा पड़ रहा हो या विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता हो, तब भी स्कूल शिफ्टिंग के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
दूरी की सीमा तय
सरकार ने स्कूलों के स्थानांतरण के लिए दूरी की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी है। नई नीति के तहत प्राथमिक स्कूलों को मूल स्थान से अधिकतम 5 किलोमीटर, माध्यमिक स्कूलों को 10 किलोमीटर और उच्च माध्यमिक स्कूलों को 20 किलोमीटर के दायरे में ही स्थानांतरित किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और उन्हें अत्यधिक दूरी तय करने की समस्या से भी राहत मिलेगी।
अनुदानित स्कूलों पर विशेष नियम
नई नीति में अनुदानित और आंशिक अनुदानित स्कूलों के लिए विशेष शर्तें भी लागू की गई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी भी स्कूल का स्थानांतरण प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा जा सकेगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी अनिवार्य होगा कि स्थानांतरण के बाद विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और शिक्षा की गुणवत्ता पहले से बेहतर हो।
दस्तावेजों की होगी सख्त जांच
स्थानांतरण की मंजूरी से पहले संबंधित सक्षम प्राधिकरण का प्रमाणपत्र, स्थानीय स्वराज्य संस्था का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), सार्वजनिक निर्माण विभाग से दूरी प्रमाणपत्र और आरटीई कानून के तहत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने का प्रमाण देना अनिवार्य किया गया है। सरकार ने कम छात्र संख्या वाले स्कूलों पर भी सख्ती दिखाई है। नई नीति के अनुसार 20 से कम छात्रों वाले प्राथमिक स्कूलों और 40 से कम छात्रों वाले माध्यमिक स्कूलों के स्थानांतरण प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह नीति राज्य की स्कूल व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।