जीएसटी का नया ढांचा: 12% और 28% स्लैब खत्म
जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक 3 सितंबर से शुरू हो चुकी है, जिसमें टैक्स संरचना में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से जीएसटी स्लैब को सरल बनाने की मांग उठती रही है और इस बार काउंसिल उस दिशा में ठोस कदम उठा सकती है। अभी जीएसटी चार प्रमुख दरों में बंटा है, लेकिन प्रस्ताव है कि 12% और 28% वाले स्लैब को खत्म करके क्रमशः 5% और 18% में समायोजित कर दिया जाए। इस कदम से उपभोक्ताओं को राहत और उद्योग जगत को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।क्या होगा सस्ता
यदि प्रस्ताव पर मुहर लगती है तो 12% से 5% वाले स्लैब में आने वाली वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। इनमें प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स जैसे पैकेज्ड मिठाइयाँ, नमकीन, टोमैटो सॉस, पापड़ आदि शामिल हैं। इसके साथ ही रेडीमेड गारमेंट्स, फुटवियर, वॉशिंग पाउडर, ब्रश, पंखे, फर्नीचर, प्लास्टिक प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रिकल एक्सेसरीज़ भी सस्ते हो जाएंगे। वहीं, घी, मक्खन, ड्राई फ्रूट्स, फार्मास्युटिकल्स, पैकेज्ड मसाले और कॉपी जैसी वस्तुओं पर भी उपभोक्ताओं को कम कीमत चुकानी होगी।
28% से 18% स्लैब में शिफ्ट होने वाले सामानों में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टीवी, फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन शामिल हैं। इसके अलावा टू-व्हीलर और मिड सेगमेंट कारें, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, परफ्यूम, पेंट्स और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री पर भी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।कहां बढ़ेगा बोझ
जहां एक ओर रोज़मर्रा की चीजें सस्ती होंगी, वहीं कुछ प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं। खासतौर पर शराब और लग्जरी गाड़ियों पर टैक्स बढ़ाकर 40% तक किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य इन वस्तुओं की खपत पर अंकुश लगाना और राजस्व को संतुलित करना है।उपभोक्ता और उद्योग जगत को फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और सस्ती कीमतों के कारण खपत में वृद्धि होगी। इससे उद्योगों की बिक्री बढ़ेगी और घरेलू निर्माण को बल मिलेगा। रोजगार सृजन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह सुधार न केवल महंगाई को नियंत्रित करने में मदद करेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था में मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में किए गए सुधारों के ऐलान के अनुरूप यह कदम घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिला सकता है।
जीएसटी स्लैब में होने वाले संभावित बदलाव उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। रोज़मर्रा की वस्तुएं सस्ती होने से आम जनता की जेब हल्की होगी, वहीं लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाकर सरकार राजस्व को संतुलित करने की कोशिश करेगी। अब नजरें जीएसटी काउंसिल की अंतिम घोषणा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि राहत और बोझ का असली संतुलन किस ओर झुकेगा।
