- गणेश भक्तों की भीड़ में चोरों की मौज, मोबाइल और गहने उड़ाए
- अनंत चतुर्दशी पर भक्ति के बीच चोरी का तांडव, पुलिस की सतर्कता पर उठे सवाल
- भारी पुलिस बंदोबस्त और तकनीकी निगरानी के बावजूद कई श्रद्धालु लुटे
मुंबई में अनंत चतुर्दशी के दिन पूरे महाराष्ट्र सहित देशभर में गणेशोत्सव की समाप्ति के साथ ही गणपति बप्पा को विदाई दी गई, जिसमें श्रद्धा और उल्लास का अद्वितीय संगम देखने को मिला। विशेष रूप से देश के सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय गणेश पंडाल ‘लालबागचा राजा’ के विसर्जन समारोह में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। मुंबई के लालबाग क्षेत्र से लेकर गिरगांव चौपाटी तक लगभग 33 से 35 घंटे लंबी शोभायात्रा में लाखों की संख्या में भक्तों ने भाग लिया और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से शहर गुंजायमान हो गया। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्साह का प्रतीक बनी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी की कड़ी परीक्षा भी साबित हुई। हालांकि, इस विशाल धार्मिक आयोजन में जहां एक ओर भक्ति का माहौल था, वहीं दूसरी ओर असामाजिक तत्वों की सक्रियता ने कई श्रद्धालुओं के लिए यह दिन कड़वी यादों में बदल दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस भीड़भाड़ के माहौल का फायदा उठाकर कई जेबकतरे और झपटमार सक्रिय हो गए, जिन्होंने सैकड़ों श्रद्धालुओं को अपना शिकार बनाया। घटनाएं मुख्यतः मोबाइल फोन, नकदी, पर्स, और सोने की चेन जैसे कीमती सामान की चोरी से संबंधित रहीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिर्फ लालबागचा राजा के विसर्जन जुलूस के दौरान मोबाइल चोरी के 100 से अधिक मामले प्रकाश में आए हैं। हालांकि, अब तक केवल 10 मामलों की ही आधिकारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें से 4 मामलों में पुलिस को सफलता मिली है और 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसी प्रकार, सोने की चेन झपटमारी के कुल 7 मामलों में शिकायत दर्ज कराई गई, जिनमें से 6 मामलों का खुलासा करते हुए दो चेन बरामद कर ली गई हैं और इस संबंध में 12 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस विभाग ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सघन जांच चल रही है। इसके अलावा, मुंबई के भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन ने ड्रोन के अवैध इस्तेमाल के दो मामले भी दर्ज किए हैं। यह उल्लेखनीय है कि मुंबई शहर में बिना पूर्व अनुमति ड्रोन उड़ाने पर सख्त प्रतिबंध है, विशेषकर ऐसे भीड़-भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान, जहां सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। इन घटनाओं के मद्देनज़र मुंबई पुलिस ने एक बार फिर नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों में भाग लेते समय सतर्कता बरतें और अपने कीमती सामान जैसे मोबाइल फोन, आभूषण, नकदी आदि को सुरक्षित स्थान पर रखें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिसकर्मी या सहायता केंद्र को दें।
गणेश विसर्जन के दौरान शहर के प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, जिनमें राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF), त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT), बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वाड सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ भी शामिल थीं। इसके अलावा, ट्रैफिक पुलिस द्वारा भी यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए थे। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों के माध्यम से जुलूस मार्ग की निगरानी की जा रही थी। इसके बावजूद भी जेबतराशी और झपटमारी की ये घटनाएं सामने आना सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में भीड़ के कारण किसी भी सुरक्षा योजना को पूरी तरह लागू कर पाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। भीड़ में चोर-उचक्के अक्सर समूहों में सक्रिय होते हैं और एक संगठित ढंग से वारदात को अंजाम देकर भीड़ में गुम हो जाते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना कठिन हो जाता है।
पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी है कि विसर्जन के दौरान हुए अधिकतर अपराध रात के समय या उन स्थानों पर हुए जहां भीड़ अधिक थी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती अपेक्षाकृत कम थी। कई पीड़ित श्रद्धालुओं ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें तब एहसास हुआ कि उनका मोबाइल या गहना गायब है, जब वे विसर्जन स्थल पर पहुंच चुके थे या जब भीड़ से बाहर निकले। यह भी पाया गया कि कई लोग अपने मोबाइल फोन से फोटो और वीडियो लेते समय असावधान हो जाते हैं, जिससे चोरों को अवसर मिल जाता है। साथ ही, कुछ श्रद्धालु आस्था के अतिरेक में अपनी चेन और अन्य गहनों को खुला छोड़ देते हैं, जो अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं।
इस पूरी घटना के परिप्रेक्ष्य में यह स्पष्ट होता है कि जनसुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी न होकर प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ नागरिकों को भी जागरूक रहना आवश्यक है, जिससे इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। पुलिस विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में भी नागरिकों से अपील की गई है कि वे धार्मिक आयोजनों में भाग लेते समय केवल आवश्यक वस्तुएँ ही साथ रखें, कीमती गहनों के प्रदर्शन से बचें, मोबाइल फोन का सावधानीपूर्वक उपयोग करें और बच्चों तथा वृद्धजनों का विशेष ध्यान रखें।
मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि लालबागचा राजा विसर्जन जुलूस के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भी आरोपी अभी फरार हैं, उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही, भविष्य में इस तरह के आयोजनों को सुरक्षित और अपराधमुक्त बनाने के लिए पुलिस प्रशासन तकनीकी निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करेगा और रणनीतिक दृष्टिकोण से ऐसे बिंदुओं की पहचान की जाएगी जहां असामाजिक तत्वों की गतिविधियाँ अधिक संभावित होती हैं।
गणेशोत्सव जैसे भव्य और पवित्र पर्व के दौरान इस प्रकार की आपराधिक घटनाएं न केवल श्रद्धालुओं की श्रद्धा को आहत करती हैं, बल्कि शहर की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अतः आवश्यक है कि प्रशासन और आम नागरिक मिलकर ऐसे आयोजनों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाएं, ताकि भविष्य में श्रद्धा के इस पर्व में कोई बाधा उत्पन्न न हो और ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष सच्चे अर्थों में शांति और सुरक्षा के साथ गूंजे।
