दो बार नीलामी न होने पर ‘पहले आओ, पहले पाओ’ से होगी बिक्री
मुंबई। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) की करीब १२५ दुकानें मुंबई और कोंकण मंडल में लंबे समय से बिना बिके पड़ी हैं। न तो इनके खरीदार मिल रहे हैं, न ही कोई इनके बारे में पूछने वाला है। इन दुकानों में फंसा प्राधिकरण का भारी फंड अब चिंता का कारण बन गया है। आखिरकार, लंबे इंतजार के बाद म्हाडा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने दुकानों की कीमतें घटाने का फैसला लिया है।
प्राधिकरण की हालिया बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में निर्णय हुआ कि दुकानों के मूल्य निर्धारण के पुराने फॉर्मूले में बदलाव किया जाएगा, ताकि छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी भी म्हाडा की दुकानों को खरीदने में सक्षम हो सकें। इसके अलावा यह भी तय किया गया कि यदि कोई दुकान दो बार नीलामी में नहीं बिकती है, तो उसे ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come, First Serve) के सिद्धांत पर बेचा जाएगा।
नीलामी में नहीं मिली सफलता
म्हाडा द्वारा आवासीय इमारतों के साथ-साथ वाणिज्यिक दुकानों का भी निर्माण किया जाता है, जिन्हें आमतौर पर नीलामी के माध्यम से बेचा जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से म्हाडा को इन दुकानों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हाल ही में मुंबई मंडल में १४९ दुकानों की नीलामी की गई थी, जिनमें से ७७ दुकानें बिना किसी बोली के खाली रह गईं। यह स्थिति केवल मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि कोंकण और अन्य मंडलों में भी यही हाल है। म्हाडा के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में दुकानें खाली रह जाने से न केवल राजस्व प्रभावित हुआ है बल्कि प्राधिकरण का कई करोड़ रुपये का फंड अटका हुआ है।
कीमतें बनी बड़ी अड़चन
म्हाडा ने जब इस स्थिति का अध्ययन कराया, तो स्पष्ट हुआ कि दुकानों के न बिकने का सबसे बड़ा कारण उनकी अत्यधिक कीमतें हैं। अब तक म्हाडा की दुकानों की कीमतें एक जटिल फॉर्मूले से तय की जाती थीं — यानी दुकानों का आधार मूल्य वाणिज्यिक रेडी रेकनर के 100 प्रतिशत या आवासीय रेडी रेकनर के 200 प्रतिशत में से जो अधिक हो, उसी के अनुसार तय किया जाता था। इस वजह से म्हाडा की दुकानें निजी बिल्डरों की दुकानों की तुलना में कहीं ज्यादा महंगी पड़ती थीं। छोटे व्यापारी या स्थानीय व्यवसायी इन दुकानों को खरीदने की स्थिति में नहीं थे। यही कारण था कि नीलामी में बोली लगाने वालों की संख्या लगातार घटती गई और अधिकांश दुकानें बिना खरीदार के रह गईं।
अब घटेगा आधार मूल्य
प्राधिकरण की नई नीति के अनुसार अब दुकानों की कीमत तय करने का नया फॉर्मूला लागू किया जाएगा। इसके तहत दुकानों का आधार मूल्य वाणिज्यिक रेडी रेकनर के 100 प्रतिशत और आवासीय रेडी रेकनर के 150 प्रतिशत में से जो भी अधिक होगा, उसी के आधार पर मूल्य निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा, नीलामी प्रक्रिया में यदि कोई व्यक्ति आधार मूल्य से अधिक बोली लगाता है, तो उसे दुकान का कब्जा दे दिया जाएगा। साथ ही यदि दो बार नीलामी के बाद भी कोई दुकान नहीं बिकती है, तो म्हाडा उसे ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर बेच सकेगा।
छोटे व्यापारियों को मिलेगी राहत
म्हाडा के इस फैसले से छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब वे भी सस्ती दरों पर म्हाडा की दुकानें खरीदकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह नीति समय रहते लागू की जाती है, तो म्हाडा की आय बढ़ेगी, खाली दुकानें बिकेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
