तीसरे सीजेरियन ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत, रक्तस्राव से गई जान; परिजनों का हंगामा, अस्पताल स्टाफ फरार
भदोही। भदोही शहर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई महिला की मौत के बाद मंगलवार को इलाके में हड़कंप मच गया। मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और अस्पताल का घेराव किया। मामला तीसरी बार किए गए सीजेरियन ऑपरेशन से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें अत्यधिक रक्तस्राव के चलते प्रसूता की मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक, भदोही कोतवाली क्षेत्र के हरियाँव गांव निवासी राजेश प्रजापति की 30 वर्षीय पत्नी रीता को सोमवार की देर रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उसे नगर के रामरायपुर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने सीजेरियन ऑपरेशन का निर्णय लिया। यह रीता का तीसरा सीजेरियन बताया जा रहा है। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी और लगातार रक्तस्राव होने लगा।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति गंभीर होने के बावजूद डॉक्टरों ने समय पर सही जानकारी नहीं दी और न ही समुचित इलाज की व्यवस्था की गई। जब हालात काबू से बाहर होने लगे तो अस्पताल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए और प्रसूता को वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। हालांकि, परिजनों के अनुसार, रेफर करने में भी काफी देर की गई, जिसका खामियाजा महिला को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। एंबुलेंस से बीएचयू ले जाते समय रास्ते में ही रीता ने दम तोड़ दिया।
मंगलवार सुबह जैसे ही घटना की जानकारी गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैली, परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पताल के बाहर जमा हो गए और लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करने लगे। लोगों का कहना था कि अगर समय रहते महिला को बेहतर इलाज और सही परामर्श दिया गया होता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जिम्मेदार डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
हंगामे की सूचना पर भदोही कोतवाली प्रभारी सच्चिदानंद पांडेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलने के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
घटना के बाद से ही अस्पताल प्रबंधन और पूरा स्टाफ फरार बताया जा रहा है। अस्पताल में ताला लटका हुआ है और शटर डाउन है। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से अस्पताल कर्मी गायब हो गए। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी जांच में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम गठित की है। टीम जब अस्पताल पहुंची तो वहां कोई डॉक्टर, स्टाफ या जरूरी कागजात नहीं मिले। अस्पताल रिकॉर्ड, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण जांच प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि भदोही और आसपास के क्षेत्रों में निजी अस्पतालों पर लापरवाही के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। हाल ही में औराई क्षेत्र में भी ऐसी ही घटनाओं के बाद एक निजी अस्पताल को सील किया गया था। इसके बावजूद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं दिख रहा है। इस ताजा घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को कठोर सजा दी जाए और पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा दिया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जा सके।
