
मुंबई । महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख Uddhav Thackeray ने राज्य सरकार के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “कर्ज लेकर पटाखे फोड़ने वाला बजट” बताया है। उनका कहना है कि सरकार ने बड़े-बड़े आंकड़ों और आकर्षक घोषणाओं के जरिए जनता को प्रभावित करने की कोशिश की है, लेकिन बजट में आम नागरिकों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए कोई ठोस और व्यावहारिक योजना नजर नहीं आती।
ठाकरे ने कहा कि सरकार ने बजट में कई योजनाओं की घोषणा की है, लेकिन उनके क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टता का अभाव है। विशेष रूप से किसानों के लिए घोषित कर्जमाफी को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार ने कर्जमाफी की बात तो कही है, लेकिन इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों और व्यावहारिक व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल कागज पर योजनाओं का ऐलान कर देना आसान होता है, लेकिन असली चुनौती यह होती है कि उन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता थी, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखाई देता। उनके अनुसार यदि योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था नहीं होगी तो उनका प्रभाव भी सीमित ही रहेगा।
शिवसेना प्रमुख ने बजट में घोषित बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मेट्रो परियोजनाओं, बुलेट ट्रेन, भूमिगत मार्ग और तथाकथित तीसरी-चौथी मुंबई जैसे प्रस्तावित विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं का लाभ मुख्य रूप से बड़े शहरों और उद्योग जगत को मिलेगा। उनका मानना है कि राज्य के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों और गरीब तबकों के लिए बजट में अपेक्षित योजनाएं नहीं दिखाई देतीं।
महिलाओं के लिए घोषित ‘लाडकी बहिन’ योजना पर भी ठाकरे ने सरकार को घेरा। उनका कहना था कि यह योजना अभी तक केवल नाम भर की पहल बनकर रह गई है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी ठाकरे ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं और कर्जमाफी की बात कर रही है, लेकिन राज्य पर बढ़ते कर्ज और बजट घाटे की स्थिति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यदि वित्तीय अनुशासन पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में राज्य की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ठाकरे ने यह भी कहा कि पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि कई बड़ी योजनाओं का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच पाता है। इसलिए सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनसे समाज के सभी वर्गों को समान रूप से लाभ मिल सके।
अपनी प्रतिक्रिया के अंत में उन्होंने कहा कि बजट केवल बड़े ऐलानों और दिखावटी योजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। राज्य की जनता को वास्तविक राहत देने और आर्थिक असमानताओं को कम करने के लिए व्यावहारिक और समावेशी नीतियों की जरूरत है। उनके अनुसार बजट तभी सार्थक माना जाएगा जब उसका लाभ सीधे आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के रूप में दिखाई दे।