
मुंबई, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बढ़ते अवैध ड्रग्स कारोबार को लेकर चिंता गहराती जा रही है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रदेश प्रवक्ता और युवक मुंबई अध्यक्ष अमोल मातेले ने गृहराज्यमंत्री योगेश कदम से मंत्रालय में मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने शहर में फैल रहे नशे के जाल को युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया।
मुलाकात के दौरान मातेले ने विशेष रूप से कॉलेज के छात्रों को निशाना बनाकर फैल रही नशाखोरी पर चिंता जताई। उन्होंने गोरेगांव के नेस्को क्षेत्र में आयोजित कथित ड्रग्स पार्टी, विक्रोली इलाके में ड्रग माफियाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई और ओवरडोज के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति तेजी से युवाओं को अपनी चपेट में ले रही है। उनके अनुसार, यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट है।
मातेले ने आरोप लगाया कि मुंबई में ड्रग्स नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा है और युवाओं को सुनियोजित ढंग से इसके जाल में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। उन्होंने “ड्रगमुक्त मुंबई” अभियान को व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ज्ञापन में मातेले ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं। इनमें ड्रग्स सप्लाई चेन की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में एंटी-ड्रग्स जागरूकता अभियान चलाना, ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना और पुलिस तंत्र को मजबूत कर खुफिया जानकारी व रोकथाम उपाय बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के लिए काउंसलिंग सेंटर और प्रभावी पुनर्वास व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की।
गृहराज्यमंत्री योगेश कदम ने इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जल्द ही संबंधित विभागों की बैठक बुलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि आगामी सोमवार को इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी, जिसमें कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य इस समस्या पर समन्वित और प्रभावी रणनीति तैयार करना है।
मातेले ने कहा कि मुंबई जैसे महानगर में युवाओं को ड्रग्स के खतरे से बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “ड्रगमुक्त मुंबई” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन होना चाहिए, जिसमें सरकार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों की संयुक्त भागीदारी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में बढ़ती नशाखोरी को रोकने के लिए सख्त कानून के साथ-साथ जागरूकता और पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। मुंबई में उठी यह मांग अब एक बड़े अभियान का रूप ले सकती है, जो आने वाले समय में शहर के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।