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वैशाली में दर्दनाक मामला: पत्नी और ससुराल वालों से परेशान पति ने लगाई न्याय की गुहार

by trilokvivechana
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हाजीपुर में पोस्टर लेकर बैठा पीड़ित पति, कहा– “शादी मत करो, मेरी हालत देख लो”

वैशाली (बिहार)। बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर में एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक पति अपनी पत्नी और ससुराल वालों से कथित रूप से प्रताड़ित होकर मानसिक रूप से टूट चुका है। स्थिति ऐसी है कि वह अब जीवन से निराश होकर मृत्यु की प्रार्थना करने की बात कह रहा है। साथ ही वह लोगों से शादी न करने की अपील भी कर रहा है।

हाजीपुर शहर के राजेंद्र चौक पर हाथ में पोस्टर लेकर बैठा यह व्यक्ति बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पताही गांव का रहने वाला शैलेश कुमार है। पोस्टर पर उसने अपने दर्द को शब्दों में बयान करते हुए लिखा है—“शादी मत करना, जिसे भी शादी करनी हो एक बार मेरी हालत देख लेना। अगर पत्नी अच्छी मिल जाए तो जीवन स्वर्ग है, लेकिन अगर गलत मिल जाए तो जीते जी नर्क जैसा जीवन हो जाता है।”

शैलेश कुमार का कहना है कि उसकी शादी वर्ष 2018 में हाजीपुर के पोखरा मोहल्ला निवासी पिंकी से हुई थी। शुरुआती समय में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद पत्नी और ससुराल पक्ष द्वारा उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। उसका आरोप है कि पत्नी उसके साथ नहीं रहना चाहती क्योंकि उसके पास पक्का मकान और आर्थिक स्थिरता नहीं है।

पीड़ित पति ने बताया कि दांपत्य विवाद को लेकर वर्ष 2023 में उसने पारिवारिक न्यायालय में मामला भी दर्ज कराया था, लेकिन उसकी पत्नी के परिजनों ने दबाव बनाकर और झूठे आश्वासन देकर समझौता करवा दिया।

शैलेश का आरोप है कि पत्नी ने अपने भाइयों और स्थानीय युवकों के साथ मिलकर उसकी पिटाई करवाई। इसके अलावा उसे साझेदारी में चल रही दुकान से भी बाहर कर दिया गया। उसने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने शादी के समय यह जानकारी छिपाई कि उसकी पत्नी की पहले भी एक शादी हो चुकी थी।

राजेंद्र चौक पर बैठे शैलेश का यह दृश्य स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उसकी स्थिति देखकर कई लोग सहानुभूति जता रहे हैं, वहीं यह मामला पारिवारिक विवादों और वैवाहिक संबंधों में बढ़ते तनाव पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

फिलहाल पीड़ित न्याय की गुहार लगा रहा है और प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहा है। यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि वैवाहिक संबंधों में संवाद और पारदर्शिता की कमी किस तरह गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकती है।

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