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किसानों के समर्थन में निकले मोर्चे पर पुलिस कार्रवाई, हर्षवर्धन सपकाल का सरकार पर तीखा हमला

by trilokvivechana
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मुंबई : कोकण के आम और काजू उत्पादक किसानों की मांगों को लेकर शुक्रवार को मुंबई की सड़कों पर बड़ा राजनीतिक और किसान आंदोलन देखने को मिला। गिरगांव चौपाटी से मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ बंगले तक निकाले जा रहे मोर्चे को पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद कई विपक्षी नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष ने भाजपा महायुति सरकार पर लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप लगाया है।

मोर्चे में हर्षवर्धन सपकाल, राजू शेट्टी, महादेव जानकर, विनायक राउत और अरविंद सावंत समेत बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता शामिल हुए थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई नेताओं को हिरासत में लेकर डोंगरी पुलिस स्टेशन और आजाद मैदान पुलिस परिसर भेज दिया।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कोकण के किसान पिछले कई महीनों से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों का शांतिपूर्ण मोर्चा लोकतांत्रिक तरीके से निकाला जा रहा था, फिर भी सरकार ने पुलिस बल का इस्तेमाल कर आंदोलन को दबाने की कोशिश की।

सपकाल ने कहा, “जब-जब सरकार डरती है, पुलिस को आगे करती है।” उन्होंने दावा किया कि भाजपा महायुति सरकार किसानों, मजदूरों और विपक्ष की आवाज को दबाने का काम कर रही है। उनके अनुसार सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय विरोध को रोकने में अधिक रुचि दिखा रही है।

मोर्चे के दौरान किसानों की ओर से आम और काजू उत्पादकों के लिए बड़े आर्थिक पैकेज की मांग उठाई गई। सपकाल ने कहा कि आम उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये और काजू उत्पादकों को प्रति हेक्टेयर 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इस दौरान विपक्ष ने बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। हर्षवर्धन सपकाल ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आम जनता लगातार महंगाई की मार झेल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही ईंधन की कीमतें बढ़ा दी गईं और जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया।

सपकाल ने कहा कि भारत पहले रूस से रुपये में तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिका के दबाव में केंद्र सरकार की नीतियां बदल गईं, जिसका असर अब सीधे आम नागरिकों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास ईंधन संकट से निपटने की कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था और NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। सपकाल ने आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों में कई बार परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं और माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना देखते हैं, लेकिन सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने में विफल रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान पर भी सपकाल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश पहले ही दो प्रधानमंत्रियों को खो चुका है, इसलिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा विपक्ष को “बिन दिमाग” कहे जाने पर पलटवार करते हुए सपकाल ने कहा कि भाजपा और आरएसएस खुद को ही बुद्धिमान मानते हैं और बाकी सभी का अपमान करते हैं। उन्होंने इसे भाजपा नेताओं की राजनीतिक कार्यशैली का हिस्सा बताया।

किसानों के मुद्दे पर हुए इस आंदोलन और पुलिस कार्रवाई ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में दिखाई दे रहा है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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