FDA की छापेमारी के बाद सबूत मिटाने का खुला खेल – क्या लाखों लोगों ने खाई जहरीली मिठाई? स्वास्थ्य जांच की मांग
त्रिलोक विवेचना विशेष
मुंबई। दीपावली का पावन पर्व तो शांतिपूर्वक समाप्त हो गया, लेकिन चेंबूर के माहुल गांव में नित्यानंद महाराज मंदिर के पास पुरानी इमारत के तल मजले पर चला अवैध नकली मिठाई कारखाना अब भी सिरदर्द बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, शाहिद खान गिरोह ने 150 से अधिक बांग्लादेशी कारीगरों को रखकर दिवाली से 10 दिन पहले जहरीली मिठाई का कारोबार चला रखा था। FDA की येवले मैडम और सहायक आयुक्त खाद्य सिंघलवाड़ के नेतृत्व में 18 अक्टूबर 2025 को खाद्य एवं औषधि विभाग व पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की, जिसमें धनतेरस से एक दिन पहले 13 घंटे की कार्रवाई चली। इस दौरान करीब 60 लाख रुपये मूल्य की नकली मिठाई जब्त की गई, सैंपल पुलिस लैब भेजे गए, पंचनामा हुआ, नोटिस चस्पा किया गया और कमरे की रिकॉर्डिंग भी की गई। छापेमारी का वीडियो सबूत उपलब्ध है (संदर्भ: [फेसबुक वीडियो लिंक](https://www.facebook.com/share/v/1DB6KbLpih/))।
लेकिन कार्रवाई का क्या हुआ?
सराहनीय तो कार्रवाई थी, लेकिन विभाग के अधिकारी जाते ही शाहिद खान गिरोह ने सील तोड़कर पूरा जब्त माल बाजार में उतार दिया! यह जहरीली मिठाई – जिसमें रासायनिक पदार्थ और नकली मावा भरा था – चेंबूर की बड़े-बड़े मिठाई दुकानों में सप्लाई हो गई। दीपावली के दौरान लाखों लोग इसे खा चुके हैं। अब सवाल उठ रहे हैं: इस जहरीले माल को किन-किन घरों में बांटा गया? क्या पेट दर्द, उल्टी, विषबाधा या गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ी हैं? अस्पतालों में ऐसे केस दर्ज हुए हैं या नहीं? प्रशासन ने अब तक कोई स्वास्थ्य जांच अभियान क्यों नहीं चलाया?
कानूनी अपराध का खुलासा:
यह मामला अब सिर्फ खाद्य भेसळ का नहीं, बल्कि संगठित अपराध का है। गिरोह ने एफएसएस एक्ट की धारा 31 (लाइसेंस), 26 (जिम्मेदारी), 58 (अस्वच्छ उत्पादन), 59 (असुरक्षित खाद्य) का खुला उल्लंघन किया। साथ ही, IPC की धारा 272 (भेसळयुक्त खाद्य बिक्री), 273 (हानिकारक खाद्य बिक्री), 379 (चोरी), 201 (सबूत नष्ट करना) और 411 (चोरी का माल रखना) के तहत अपराध सिद्ध होता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हिंदुस्तान कोका-कोला बनाम महाराष्ट्र (2024) और संभाजी पठारकर बनाम महाराष्ट्र (1978) जैसे मामलों में सबूत मिटाने और भेसळ के खिलाफ सख्त सजा के आदेश दिए हैं। बांग्लादेशी कारीगरों का अवैध प्रवास भी जांच का विषय है।
प्रशासन पर सवालों की बौछार:
– छापेमारी के बाद गिरोह को भागने का मौका क्यों मिला?
– जब्त माल की निगरानी कौन कर रहा था?
– चेंबूर की मिठाई दुकानों की सप्लाई चेन का ट्रेसिंग कब होगा?
– प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच कब शुरू होगी?
त्रिलोक विवेचना के संपादक संदीप त्रिलोकीनाथ शुक्ला ने सभी विभागों को ईमेल भेजकर FIR दर्ज करने, गिरोह पर छापा मारने और स्वास्थ्य जांच अभियान चलाने की मांग की है। “दीपावली खत्म हो गई, लेकिन खतरा बाकी है। अगर अब भी चुप्पी रही, तो यह प्रशासन की मिलीभगत साबित होगी,” शुक्ला ने कहा।
नागरिकों से अपील:
यदि आपने दीपावली पर चेंबूर की किसी दुकान से मिठाई खरीदी और स्वास्थ्य समस्या महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और स्थानीय पुलिस/FDA को सूचित करें। त्रिलोक विवेचना इस कांड को तब तक उजागर करता रहेगा, जब तक पूरी कार्रवाई न हो।
