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मुंबई पर किसकी नजर? 36 दिनों में 82 बच्चे लापता, बढ़ी चिंता

by admin
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लापता बच्चों में 60 लड़कियां शामिल, पुलिस आंकड़ों ने बच्चों की सुरक्षा पर खड़े किए गंभीर सवाल

मुंबई।

मायानगरी मुंबई पर मानो किसी की बुरी नजर लग गई है। देश की आर्थिक राजधानी से बच्चों के लापता होने के लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की चिंता भी बढ़ा दी है। सिर्फ 36 दिनों में 82 बच्चों के लापता होने की पुलिस रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें बड़ी संख्या नाबालिग लड़कियों की है। आंकड़ों ने एक बार फिर महानगर में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महाराष्ट्र पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, एक नवंबर से छह दिसंबर के बीच मुंबई में कुल 82 बच्चों और किशोरों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 60 मामले लड़कियों से जुड़े हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बेहद चिंताजनक है, क्योंकि लापता बच्चों में लगभग तीन-चौथाई हिस्सेदारी सिर्फ लड़कियों की है। पुलिस डेटा के अनुसार, इस अवधि में लापता होने वालों की उम्र अधिकांशतः 18 वर्ष से कम बताई जा रही है।

यही नहीं, बीते महीनों के आंकड़े भी राहत देने वाले नहीं हैं। महाराष्ट्र पुलिस के महीनेवार डेटा रिव्यू से पता चलता है कि इस साल जून से छह दिसंबर के बीच मुंबई से कुल 134 नाबालिग लापता हुए, जिनमें 86 लड़कियां शामिल हैं। यह साफ संकेत देता है कि महीनों से यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और स्पष्ट हो जाती है। जून महीने में मुंबई से 26 बच्चे लापता हुए, जिनमें सभी 26 लड़कियां थीं। जुलाई में 25 मामलों में से 15 लड़कियां लापता रहीं। अगस्त में 19 बच्चों के लापता होने की सूचना मिली, जिनमें 14 लड़कियां थीं। सितंबर में 21 बच्चों में 15 लड़कियां लापता हुईं। अक्टूबर में कुल 19 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 7 लड़कियां शामिल थीं। नवंबर में 24 लापता मामलों में से 15 लड़कियां थीं, जबकि दिसंबर के शुरुआती छह दिनों में ही 11 बच्चे लापता हो चुके हैं, जिनमें 8 लड़कियां शामिल हैं।

हालांकि, मुंबई जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहर में बच्चों के लापता होने की घटनाएं पूरी तरह नई नहीं हैं, लेकिन लगातार बढ़ते आंकड़े प्रशासनिक चिंता के साथ-साथ सामाजिक डर को भी बढ़ा रहे हैं। खासकर नाबालिग लड़कियों की बढ़ती संख्या ने माता-पिता की नींद उड़ा दी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो आंकड़े सामने आए हैं, वे केवल आधिकारिक तौर पर दर्ज मामलों पर आधारित हैं। वास्तव में लापता बच्चों की संख्या इससे अधिक हो सकती है। कई मामलों में माता-पिता सामाजिक बदनामी, पारिवारिक दबाव और झिझक के चलते पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराते। ऐसे में कई बच्चे पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाते, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ जाती है।

मुंबई पुलिस का दावा है कि गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस जमीनी स्तर पर पूछताछ के साथ-साथ रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी गहन जांच कर रही है। इसके अलावा अन्य राज्यों की पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल से भी समन्वय किया जा रहा है।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी संदिग्ध स्थिति में कोई बच्चा दिखाई दे, तो तुरंत जानकारी पुलिस को दें। अधिकारियों का कहना है कि समय पर सूचना मिलने से कई बच्चों को सुरक्षित वापस लाया जा सकता है।

महत्वपूर्ण सूचना:

– 112 नंबर पर कोई भी नागरिक पुलिस को फोन कर लापता बच्चों के बारे में सूचना दे सकता है।

– 1098 चाइल्डलाइन हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे सक्रिय है और संकट में फंसे बच्चों की मदद के लिए उपलब्ध है।

बहरहाल, मुंबई जैसे महानगर में इतने कम समय में बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियों के लापता होने की घटनाएं प्रशासन और समाज—दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। अब जरूरत है सख्त निगरानी, जनजागरूकता और बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत और संवेदनशील व्यवस्था की।

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