
मुंबई। महानगर की झोपड़पट्टियों में क्षयरोग पर काबू पाने के लिए एक व्यापक और लक्षित अभियान की शुरुआत होने जा रही है। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की पहल पर मई के दूसरे सप्ताह से ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान चलाया जाएगा, जिसमें सरकारी तंत्र के साथ सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
इस महत्वाकांक्षी अभियान में राज्य का स्वास्थ्य विभाग, मुंबई महानगर पालिका, रेड क्रॉस सोसायटी और विभिन्न विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे। उद्देश्य है—घनी आबादी वाले इलाकों में टीबी की समय रहते पहचान, उपचार और जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाना।
राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही, तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं के साथ अलग बैठक कर तकनीकी सहयोग और जनजागरूकता को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर देशभर में चल रहे ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान को शहरी झोपड़पट्टियों में विशेष रणनीति के साथ लागू करना आवश्यक है, क्योंकि यहां जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है। इसी के तहत मुंबई के कुर्ला सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।
अभियान के तहत बड़े पैमाने पर टीबी जांच शिविर लगाए जाएंगे, ताकि बीमारी का समय पर पता लग सके। साथ ही रेड क्रॉस की महाराष्ट्र शाखा लोगों के बीच जागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा और परामर्श का कार्य संभालेगी।
इस पहल को जनआंदोलन का रूप देने के लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर, स्काउट गाइड, रोटरी क्लब और युवा रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों को भी जोड़ा जाएगा। इनकी मदद से घर-घर पहुंचकर लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के बारे में जानकारी दी जाएगी।
राज्यपाल ने निर्देश दिया कि टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि उपचार के दौरान उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। उन्होंने रेड क्रॉस सोसायटी को विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय बढ़ाने और छात्रों को भी इस अभियान में शामिल करने की सलाह दी।
अभियान की एक खास बात कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर तंत्रशास्त्र विश्वविद्यालय से सहयोग लेते हुए उन झोपड़पट्टियों की पहचान की जाएगी, जहां टीबी का जोखिम अधिक है, ताकि संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो सके।
राज्यपाल ने रेड क्रॉस को राज्य के सभी जिलों में अपनी गतिविधियां तेज करने और निष्क्रिय इकाइयों को फिर से सक्रिय करने के निर्देश दिए। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को लोक भवन की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, प्रशासन और जनसहभागिता के इस समन्वित मॉडल से मुंबई में टीबी नियंत्रण को नई गति मिलेगी और यह पहल देश के अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।